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लोकपाल की नियुक्ति में हो रही देरी को लेकर दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की नियत पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या मोदी सरकार लोकपाल की नियुक्ति करने में अपना पूरा बचा कार्यकाल लगा देगी? सुप्रीम कोर्ट ने कहा, लोकपाल एक्ट 2014 में बना था, अब तक प्रक्रिया पूरी क्यों नहीं हुई. लोकपाल की नियुक्ति क्यों नहीं हुई.

कोर्ट ने सरकार से पूछा कि आखिर अब तक लोकपाल कानून में संशोधन क्यों नहीं किया गया है ? क्यों सरकार संशोधन करने से अपने कदम क्यों पीछे खींच रही है ? चीफ जस्टिस ने कहा इस सरकार को बने ढाई साल हो चुके हैं, जब तक ये सरकार है कोई भी नेता प्रतिपक्ष नहीं बन सकता तो क्या इस वजह से लोकपाल की नियुक्ति अटकी रहेगी ?? हम ऐसा कैसे होने दे सकते हैं कि लोकपाल जैसी संस्था का कोई मतलब ही न हो.

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अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने बेंच से कहा कि सदन की एक सिलेक्ट कमिटी को यह एक्ट रेफर किया गया है, जिसने कानून में कई बदलावों की सिफारिश की है. उन्होंने कहा, ‘संसद इन सुझावों पर विचार कर रही है. इसमें समय लगेगा. हम भ्रष्टाचार निरोधक कानून में बदलाव के बारे में भी सोच रहे हैं.

बेंच ने अटॉर्नी जनरल  को लताड़ लगाते हुए कहा, ‘क्या आप अपने कार्यकाल का बाकी ढाई से तीन साल का समय भी यह बदलाव करने में लगाएंगे? आखिर यह सार्वजनिक जीवन में शुचिता लाने के लिए बनाया गया कानून है.’ चीफ जस्टिस ने उनसे पूछा कि सरकार ने इसे लागू करने के लिए अध्यादेश क्यों नहीं जारी किया. उन्होंने कहा, ‘क्या अध्यादेश पर्याप्त नहीं होता? इस मामले की अगली सुनवाई 7 दिसंबर को होगी.

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