नई दिल्ली | 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही सरकार ने हमेशा यह दिखाने की कोशिश की है की उन्होंने कालेधन के खिलाफ कई सख्त कदम उठाये है. इसमें नोट बंदी जैसे कदम भी शामिल है. लेकिन अभी तक मोदी सरकार की तरफ से यह नहीं बताया गया की उन्होंने कालाधन रखने वाले नेताओ के खिलाफ कोई कार्यवाही की है या नहीं। चुनाव सुधार की पैरवी करने वाली सरकार से सुप्रीम कोर्ट ने इस बारे में ब्यौरा माँगा है.

बुधवार को एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को जमकर फटकार लगाई। सुप्रीम कोर्ट का कहना था की मोदी सरकार ने कोर्ट में कालेधन के खिलाफ उठाये गए कदमो के बारे में पूरी जानकारी नहीं दी. उन्होंने कहा की केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने भी जो हलफनामे कोर्ट में दाखिल किये है उनमे दी गयी सूचना अधूरी ही. इसके अलावा कोर्ट ने उन नेताओ के बारे में भी सवाल किया जिनकी संपत्ति दो चुनावो के बीच 500 फीसदी बढ़ गयी.

सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा की केंद्र सरकार ने अदालत को अभी तक इस बात की सूचना नहीं दी है की उन्होंने उन नेताओ के खिलाफ क्या कार्यवाही की है जिनकी संपत्ति दो चुनावो के बीच 500 फीसदी तक बढ़ गयी. अदालत ने केंद्र सरकार को आदेश दिया की वो इस बारे में जरुरी सूचना अदालत के समक्ष रखे. चुनाव सुधार के मामले में केंद्र सरकार के रुख पर भी अदालत ने संसय जाहिर किया.

जस्टिस जे चेलमेश्वर और जस्टिस एस अब्दुल नजीर की पीठ ने केंद्र सरकार को नसीहत देते हुए कहा की एक तरफ आप कहते है की हम चुनाव सुधार के खिलाफ नहीं है वही दूसरी तरफ आप उससे जरुरी विवरण अदालत ने नहीं रख रहे. सीबीडीटी के हलफनामे में भी सूचना अधूरी है, क्या यही सरकार का रुख है. आपने अब तक क्या किया? अदालत ने आदेश दिया की सरकार 12 सितम्बर तक अदालत में विस्तृत हलफनामा दाखिल करे.


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