नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने कोहिनूर हीरा देश में वापस लाए जाने की मांग करने वाली जनहित याचिका पर शुक्रवार को सरकार से अपना रुख स्पष्ट करने को कहा। प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने सॉलिसिटर जनरल से इस मामले में एक हफ्ते के अंदर निर्देश लेने को कहा। पीठ ने हालांकि जनहित याचिका पर नोटिस जारी नहीं किया।

कोहिनूर पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सरकार से मांगा जबाव

पीठ ने सॉलिसिटर जनरल से कहा कि हर कोई कोहिनूर पर दावा कर रहा है। कितने देश कोहिनूर पर दावा कर रहे हैं? पाकिस्तान, बांग्लादेश, भारत और यहां तक कि दक्षिण अफ्रीका। यहां भी कोई आदमी कोहिनूर के लिए बोल रहा है। क्या आप इसके बारे में जानते हैं। सॉलिसिटर जनरल रंजीत कुमार ने कहा कि वह इससे अवगत नहीं हैं और उन्हें निर्देश लेने और पुन: अदालत के पास आने के लिए समय चाहिए।

पीठ में न्यायमूर्ति आर भानुमती और न्यायमूर्ति यू यू ललित भी शामिल थे। सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि प्रेस में एक खबर आई है जिसमें ब्रिटिश प्रधानमंत्री के हवाले से कहा गया है कि अगर हम ऐसी मांगों को स्वीकार करते रहे तो ब्रिटिश संग्रहालय खाली हो जाएगा। पीठ ने याचिकाकर्ता से कहा कि आप सरकार से क्यों नहीं संपर्क करते? क्या सरकार ने इस मामले को नहीं उठाया है? सरकार ने कुछ किया है। जो किया जा सकता है, उन्होंने किया है। न्यायालय ‘आल इंडिया ह्यूमन राइट्स एंड सोशल जस्टिस फ्रंट’ द्वारा दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा था।

याचिका में विदेश मंत्रालय, संस्कृति मंत्रालय, ब्रिटेन, पाकिस्तान और बांग्लादेश के उच्चायुक्तों को पक्ष बनाया है। याचिका में अदालत से ब्रिटेन के उच्चायुक्त को हीरा लौटाने का निर्देश देने को कहा गया है। इसके अलावा कुछ और अनमोल वस्तुएं भी मांगी गई हैं। इनमें टीपू सुल्तान की अंगूठी और तलवार के अलावा टीपू सुल्तान, बहादुर शाह जफर, झांसी की रानी, नवाब मीर अहमद अली बांदा और अन्य शासकों से जुड़ी चीजें भी लौटाए जाने की मांग की गई है। (khabar.ibnlive.com)


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