नई दिल्ली | पिछले साल 8 नवम्बर को देश के प्रधानमंत्री मोदी ने 500 और 1000 के नोटों को बंद करने का एलान कर पुरे देश में खलबली मचा दी थी. उस समय मोदी ने लोगो से वादा किया की उनके सभी पुराने नोट 30 दिसम्बर तक बदल दिए जायेंगे. इसके बाद भी अगर लोगो के पास पुराने नोट बचते है तो वो 31 मार्च तक रिज़र्व बैंक की शाखाओ में जाकर इनको बदल पाएंगे. लेकिन सरकार ने 30 दिसम्बर के बाद किसी भी पुराने नोट को बदलने से इंकार कर दिया.

सरकार के इस फैसले से उन लोगो को काफी निराशा हुई जो किन्ही कारणों से 30 दिसम्बर तक पुराने नोट नही बदल पाए. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में भी कई याचिकाए भी दाखिल की गयी. ज्यादातर याचिकाओ को सुप्रीम कोर्ट पहले ही ख़ारिज कर चूका है. एक याचिका में तो याची ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाकर पुराने नोटों को दोबारा बदलें की मांग की थी. उस समय जस्टिस डी वाई चंद्रचूड और एस के कौल की बेंच ने यह याचिका ख़ारिज कर दी थी.

उधर एक अन्य याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आज मोदी सरकार को फटकार लगाई. कोर्ट ने मोदी सरकार से पुछा की आखिर लोगो को पुराने नोट बदलने का दूसरा मौका क्यों नही दिया गया. जिस व्यक्ति के पास वाजिब कारण था उन लोगो को मौका क्यों नही दिया गया. सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से दो हफ्ते के अन्दर कोर्ट में जवाब दाखिल करने के लिए कहा है.

बताते चले की मोदी सरकार ने 500 और 1000 रूपए के करीब साढ़े 15 लाख करोड़ रूपए चलन से बाहर कर दिए थे. जिससे पुरे देश में अफरा तफरी का माहौल बन गया था. पुरे देश में बैंकों और एटीएम के बाहर लम्बी लम्बी कतारे देखि गयी. यहाँ तक की लाइन में लगे लगे कुछ लोगो की जान भी चली गयी. विपक्ष ने इसे एक बड़ा मुद्दा बनाया लेकिन सरकार ने अपने फैसले को बदलने से इनकार कर दिया.


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