गुजरात दंगों के दौरान सामूहिक बलात्कार का शिकार बनी और अपने परिवार के 14 लोगों के कत्ल की चश्मदीद गवाह रही बिलकिस बानो के मामले की जांच में गड़बड़ी और सबूत छिपाने के दोषी करार पुलिस अफसर आरएस भगोरा, चार अन्य पुलिस अफसर व दो डाक्टरों की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है. इन सभी को बांबे हाई कोर्ट द्वारा दोषी करार दिया गया है.

जस्टिस एसए बोबडे और एल. नागेश्वर राव ने अपील खारिज करते हुए कहा कि ‘निचली अदालत ने आप लोगों को बिना किसी कारण बरी कर दिया था, जबकि आपके खिलाफ स्पष्ट सुबूत थे.’ जिसके बाद बॉम्बे हाई कोर्ट ने फैसला पलटते हुए आईपीएस आरएस भागोरा सहित पांच पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराया है.

बताते चले की 2002 में गुजरात दंगो के दौरान दंगई भीड़ से बचने के लिए बिलकिस बानो (19 वर्षीय) अपने परिवार के साथ एक ट्रक में जा रही थी. उस समय ट्रक में बिलकिस बानो के परिवार के 17 सदस्य मौजूद थे जिसमें उसकी एक 2 साल की बच्ची भी शामिल थी. अचानक से उनके ट्रक पर एक भीड़ हमला करती है और बिलकिस बानो के परिवार के 14 लोगो को मौत के घाट उतार देती है. मरने वालो में दो साल की बच्ची भी शामिल थी. यही नही दंगई भीड़ में से कुछ लोग, बिलकिस बानो के साथ बलात्कार भी करते है. जबकि उस समय वह पांच महीने की गर्भवती थी.

इस मामलें में बंबई उच्च न्यायालय ने चार मई को निचली अदालत के फैसेल को बरकरार रखते हुए 18 आरोपियों को सजा सुनाई. इनमें से 11 को आजीवन कारावास जबकि साक्ष्यों को मिटाने के आरोप में सात पुलिसकर्मियों और डाक्टरों को बरी किये जाने के अभियोजन पक्ष की अपील को रद्द कर दिया और उन पर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया.

उम्र कैद की सजा पाने वालो में जसवंत नाई, गोविंद नाई, सैलेश भट्ट, राधेश्याम भगवान दास शाह, बिपिन चंद्रा जोशी, केसरभाई वोहानिया, प्रदीप मोर्धिया, बाकाभाई वोहानिया, राजूभाई सोनी, मितेश भट्ट औप रमेश चंदन शामिल है.


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