नई दिल्ली | सुप्रीम कोर्ट ने कई कल्याणकारी योजनाओं के सही तरीके से लागू नही किये जाने पर केंद्र एवं राज्यों सरकारों को फटकार लगायी है. सुप्रीम कोर्ट ने बेहद तल्ख़ टिपण्णी करते हुए कहा की अगर आप योजनाओं को सही तरीके से लागु नही कर सटके तो ऐसी योजनाये तैयार ही क्यों की जाती है. कोर्ट ने ऐसी योजनाओं को पैसे की बर्बादी करार दिया.

बुधवार को शहरी बेघरो की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को आड़े हाथो लेते हुए कहा की हम कुछ जरूरतमंद लोगों की मदद करने का प्रयास कर रहे हैं. कम से कम इन लोगों के प्रति थोडी तो करूणा दिखायें. शहरी बेघरो को घर देने की योजना पर राज्य सरकारों की और से खर्च का विवरण नही देने पर भी सुप्रीम कोर्ट नाराज दिखा.

हरियाणा , उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल की राज्यों सरकारों ने अभी तक कोर्ट में ऐसी योजनाओं पर हुए खर्च का विवरण जमा नही किया है. इस पर राज्य सरकारों को फटकार लगाते हुए कोर्ट ने कहा की राज्यों को बेघरों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए लेकिन ऐसा लगता है कि वे गरीबों की परेशानियों को लेकर चिंतित ही नहीं है. मामले में केंद्र सरकार की और से पेश हुए अतिरिक्त सोलिसिटर जनरल आत्माराम नाडकर्णी से कोर्ट ने कहा कि आप इस योजना को खत्म क्यों नहीं कर देते.

यह कर दाताओ के पैसे के बर्बादी है. आप (केन्द्र) हजारों करोड रूपए खर्च कर रहे हैं जिसका इस्तेमाल भारत सरकार दूसरे महत्वपूर्ण कार्यो के लिये कर सकती है. यह क्षुब्द कर देने वाला है. कोर्ट ने कहा कि केन्द्र यह नहीं कह सकता कि उसने राज्यों को धन मुहैया करा दिया है और इसके साथ ही उसका काम खत्म हो गया और राज्य इस बात की परवाह नहीं करेंगे कि क्या धन बर्बाद हो रहा है या इसे किस तरह खर्च किया जा रहा है. याचिकाकर्ता की तरफ से प्रशांत भूषण ने दलील दी की यूपी सरकार बेघरो को आश्रय देने की बजाय गायो को आश्रय देने के लिए ज्यादा चिंतित है.


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