सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में साल की शुरुआत में हुए विधानसभा चुनाव में इस्तेमाल ईवीएम के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगाकर दायर की गई जनहित याचिका पर चुनाव आयोग से जवाब माँगा है.

चीफ जस्टिस जगदीश सिंह खेहर और िधनन्जय वाई चन्द्रचूड की बेंच को चुनाव आयोग के वकील ने सूचित किया कि बसपा की नेता मायावती सहित कुछ राजनीतिक दलों ने भी इसी तरह की याचिकायें दायर की हैं और वे दूसरी बेंच के समक्ष लंबित हैं.

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आयोग ने कहा कि उन याचिकाओं पर पहले ही नोटिस जारी हो चुके हैं इसलिये इस याचिका को भी उसके साथ ही संलग्न कर देना चाहिए. ऐसे में मामले में याचिकाकर्ता के वकील मनोहर लाल शर्मा ने आयोग की दलील का विरोध किया और कहा कि उनकी जनहित याचिका दूसरे विषय के बारे में है और कोई भी राजनीतिक दल जनहित याचिका के माध्यम से न्यायालय में नहीं आ सकता है.

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उन्होंने कहा, मेरा मामला पूरी तरह से भिन्न है. आयोग के वकील. न्यायालय को गुमराह कर रहे हैं. वे याचिकायें राजनीतिक दलों ने दायर की हैं. राजनीतिक दलों ने कैसे जनहित याचिका दायर की. बेंच ने कहा कि चुनौती वाले मामले की विषय वस्तु इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनें हैं. आप कहते हैं कि ईवीएम ठीक नहीं हैं. यह एकदम वही बात है.

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बेंच ने आयोग को दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश देने के साथ ही याचिकाकर्ता को इसके बाद दो सप्ताह में प्रतिउार दाखिल करने का आदेश दिया. न्यायालय ने पहले से ही लंबित मामले में इस याचिका को संलग्न करने का भी निर्देश दिया.


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