अपनी जान बचाने के लिए भारत में शरण लिए हुए रोहिंग्या मुस्लिमों को भारत सरकार ने डिपोर्ट करने की तैयारी शुरू कर दी है. लेकिन इसी बीच देश की शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार से इस बारें में जवाब मांगा है.

याचिकाकर्ता रोहिंग्या मुस्लिम मोहम्‍मद सलीमउल्‍लाह और मोहम्‍मद शाकिर की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से विस्‍तृत रिपोर्ट मांगी है. कोर्ट से इस मामले में हस्तक्षेप करने और उन्हें वापस भेजने से रोकने की अपील की गई.

दो रोहिंग्या शरणार्थियों की ओर से पेश हुए ऐडवोकेट प्रशांत भूषण ने कहा कि रोहिंग्या मुसलमान दुनिया में सबसे अधिक मुश्किलों का सामना करने वालों में शामिल हैं. भूषण ने कोर्ट से निवेदन किया कि सरकार यह आश्वासन दे कि इस बीत रोहिंग्या मुसलमानों को देश से नहीं निकाला जाएगा.

उन्होंने कहा कि अगर रोहिंग्या मुसलमानों को जबरदस्ती पड़ोसी देश म्यांमार भेजा गया, तो यह एक तरह से उन्हें काल के मुंह में डालना जैसा होगा. उनके मुताबिक वापस भेजे जाने वाले रोहिंग्या मुसलमानों को स्थानीय सेना के हाथों उनकी मौत दी जा सकती है.

इस मुद्दे पर सरकार की ओर से जवाब मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट इन दोनों याचिकाओं पर सोमवार को सुनवाई करेगा.हालांकि कोर्ट ने इस मुद्दे पर अंतरिम रोक लगाने के की मांग ठुकरा दी.

गौरतलब रहे कि केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू का कहना है कि सरकार रोहिंग्‍या मुसलमानों को वापस म्‍यांमार भेजेगी. यह कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत होगी.


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