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देश भर में तीन तलाक पर रोक लगाने की बहस के बीच इस मामलें पर सुन्नी बरेलवी मसलक के उलेमाओं का समर्थन मिला है.

गुरुवार को दरगाह-ए-आला हजरत में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में दरगाह सज्जादानशीन मौलाना अहसन रजा कादरी ने कहा कि आगामी 26 जुलाई को मुरादाबाद में होने वाली सुन्नी बरेलवी कॉन्फ्रेंस में हजारों मुसलमानों को बताया जाएगा कि एक साथ तीन तलाक देना कितना बड़ा गुनाह है और इससे कितने नुकसान हैं.

कॉन्फ्रेंस के आयोजक मौलाना अहसन रजा कादरी ने कहा कि शरियत की जानकारी के अभाव में गलत तरीके से तीन तलाक देने की प्रथा जोर पकड़ रही है. इसलिए मुसलमानों को बताया जाएगा कि तलाक देने का सही तरीका क्या है. तीन तलाक देने वाला कितना बड़ा गुनाह करता है और उसे कितने नुकसान होते हैं इसका अहसास बाद में होता है. इन बातों से भी लोगों को जागरूक किया जाना जरूरी हो गया है. इससे एक साथ तीन तलाक पर रोक लगाई जा सकेगी.

इसके अलावा दुनिया भर में शांति और देश की एकता के लिए दरगाह आला हजरत के तत्वाधान में विश्व शांति मंच का गठन किया गया है. मंच की तरफ से पहली सुन्नी बरेलवी कॉन्फ्रेंस मुरादाबाद में होंगी. इस कॉन्फ्रेंस में देश की 14 से भी अधिक खानकाहों के सज्जादानशीन शामिल होंगे. इसके बाद 25 देशों में कॉन्फ्रेंस होंगी. इन कांफ्रेंस के जरियें देश में एकता और दुनिया में शांति का पैगाम दिया जाएगा.

वहीं, सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर काम करने वाली नाइश हसन ने कहा, हम तीन तलाक पर रोक की सहमति का स्वागत करते हैं क्योंकि कुरान और संविधान इसकी सहमति नहीं देता. यह सिर्फ पुरुषों की दकियानूसी बातें हैं जो महिलाओं के साथ नाइंसाफी कर रहे थे.

एपवा की ताहिरा हसन ने सुन्नी बरेलवी की सहमति का स्वागत करते कहा, ‘सूरह निसा में भी कहीं भी तीन तलाक के बारे में नहीं कहा गया है. कुछ पुरुष गैर मुनासिब बातें करके इस्लाम को बदनाम कर रहे हैं.


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