“भारत के सुन्नी सूफ़ी मुसलमानों की प्रतिनिधि सभा ऑल इंडिया तंज़ीम उलेमा ए इस्लाम और मुस्लिम स्टूडेंट्स आर्गेनाइजेशन ऑफ़ इंडिया इस शुक्रवार यानी 4 मार्च दोपहर 3 बजे से जयपुर के रामलीला मैदान में एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन कर रही है जिसमें देश में अलगाववादी विचारधारा के प्रसार और आतंकवाद के विरुद्ध जनमानस बनाने की रूपरेखा तैयार होगी। ”

सभा के बाद राजस्थान की मुख्यमंत्री के कार्यालय के मार्फ़त भारत सरकार के नाम विस्तृत ज्ञापन भी दिया जाएगा जिसमें कई मुद्दों पर प्रकाश डाला जाएगा।

तंज़ीम के प्रवक्ता इंजिनियर शुजात अली क़ादरी ने बताया कि ऑल इंडिया तंज़ीम उलामा ए इस्लाम के पूरे भारत में दस लाख से अधिक लोग सदस्य हैं और वह भारत के सुन्नी सूफ़ी विचारधारा यानी ‘सुन्नत वल जमात’ की प्रतिनिधि सभा है जिसमें देश भर के दरगाहों, ख़ानक़ाहों और सूफ़ी मस्जिदों के इमाम समाज के हितार्थ अपनी राय को प्रकट करते हैं। समाज के सम्मुख आ रही समस्याओं जैसे आतंकवाद, कट्टरता, सामुदायिक और साम्प्रदायिक हिंसा और इससे निपटने के मुद्दे पर समाज में व्यापक लेकिन सकारात्मक बहस हो रही है। वैचारिक रूप से शांतिप्रिय सूफ़ी समुदाय की इच्छा है कि आतंकवाद और कट्टरता पर वह खुलकर अपनी राय रखे और वैश्विक आतंकवाद के लिए ज़िम्मेदार वहाबी विचारधारा को पालने वालों का पर्दाफ़ाश करे।

इसी क्रम में ऑल इंडिया तंज़ीम उलामा ए इस्लाम इस शुक्रवार यानी 4 मार्च को जयपुर के रामलीला मैदान में एक दिवसीय विशाल राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित कर रही है जिसमें प्रमुख वक्ता के रूप में इंग्लैंड के वर्ल्ड इस्लामिक मिशन  के महासचिव क़मरुज़्ज़माँ आज़मी अपने विचार रखेंगे जबकि अध्यक्षीय संबोधन तंज़ीम के संस्थापक अध्यक्ष मुफ़्ती अशफ़ाक़ हुसैन क़ादरी का होगा। सम्मेलन की अध्यक्षता दरगाह ख्वाजा साहेब अजमेर के प्रमुख सय्यद वाहिद हुसैन चिश्ती तथा राजस्थान के चीफ मुफ़्ती शेर मुहम्मद करेंगे। सम्मेलन में क़रीब 25 हज़ार सूफ़ी विचारकों और सूफ़ी मुसलमानों के शरीक़ होने की ख़बर है।

सय्यद मुहम्मद क़ादरी अध्यक्ष मुस्लिम स्टूडेंट्स आर्गेनाइजेशन ऑफ़ इंडिया ने कहा कि सम्मेलन में बताया जाएगा कि भारत को वैश्विक आतंकवाद से बचाने के लिए हमें तीन मुद्दों पर सक्रिय रूप से कार्य करना होगा। वक़्फ़ बोर्ड से वहाबी क़ब्ज़े हटाने होंगे, हज कमेटियों का पुनर्गठन करना होगा और भारत के स्कूल एवं मान्य विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम से वहाबी सामग्री हटाकर सूफ़ी वैचारिक इस्लामी शिक्षा की तरफ़ जाना होगा।

हाजी रफत आयोजन समिति संयोजक ने बताया की इस सम्मेलन में उन देशों के बारे में बताया जाएगा जिन्होंने वैश्विक आतंकवाद पर क़ाबू पाने में अपूर्व सफलता अर्जित की है। सूफ़ी देश मिस्र और क़ज़ाख़स्तान ही नहीं बल्कि जहां मुस्लिम बहुमत में तो नहीं लेकिन अच्छी तादाद में हैं वहाँ उन्होंने वहाबी आतंकवाद से लड़ने में सरकार और क़ानून का साथ दिया है। इसमें अल्बानिया, अल्जीरिया, अज़ैरबाइजान, बांग्लादेश, बोस्निया एवं हरज़ेगोविना, घाना, इंडोनेशिया, ईरान, इराक़, कोसोवो, किर्गीज़िस्तान, माली, मोरक्को, रूस, सेनेगल, सूरीनाम, सीरिया, ताजिकिस्तान, तंज़ानिया, ट्यूनिशिया, तुर्कमेनिस्तान, उज़्बेकिस्तान और यमन का नाम भी प्रमुख है।

आयोजन समिति के वाहिद यजदानी ने बताया की सम्मेलन में अजमेर दरगाह के सुहैल मियाँ, फ़ुर्क़ान अली, मुईनुद्दीन अशरफ़, बरेली शरीफ के मन्नान रज़ा खान, मदरसा बोर्ड के पूर्व चेयरमैन मौलाना फजले हक़, खानकाहे रब्बनिया के सज्जादानशीन मौलाना सय्यद कौसर रब्बानी जबलपुर, जोधपुर से सुन्नी दावते इस्लामी के राजस्थान मुखिया मौलाना फ़य्याज़ अहमद रजवी, जयपुर के समाजसेवी हाजी रफत खान, दरगाह हज़रत निजामुद्दीन दिल्ली के सय्यद नाजिम निजामी,  नागोर के मौलाना  मुहम्मद हनीफ़ रज़वी, ग़ुलाम रसूल, अकबर अली फ़ारूक़ी, मौलाना तहतीर अहमद और निज़ामुद्दीन समेत क़रीब  हज़ारों सूफ़ी उलेमा शरीक़ होंगे। कार्यक्रम की सभी तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं।


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