बरेली मसलक से जुड़े उलेमाओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाक़ात कर सवाल उठाया कि आप हुर्रियत एवं उन लोगों से क्यों बात करते हैं, जो ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाते हैं.

करीब 30 मिनट तक चली इस बैठक के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने गृहमंत्री को बताया कि वे कश्मीर घाटी में वर्तमान स्थिति से चिंतित हैं और शांति लाने में मदद करना चाहते हैं.

गरीब नवाज फाउंडेशन के मौलाना अंसार रजा ने कहा कि, ‘हम लोगों ने गृह मंत्री से मुलाकात की एवं उन्हें प्रस्ताव दिया कि उन्हें सूफी विद्वानों एवं मुस्लिम धर्मगुरुओं के प्रतिनिधिमंडल का घाटी में नेतृत्व करना चाहिए. उन्होंने कहा कि, हम लोग पत्थरबाजी करने वाले युवकों के दिमाग में कुछ ज्ञान डालने का प्रयास करेंगे.

मौलाना अंसार रजा ने  आगे कहा कि देश भर के विभिन्न खानकाहों से 60 सूफी एक हाथ में कुरान एवं दूसरे हाथ में तिरंगा लेकर कश्मीर में शांति मार्च निकालने की योजना बनाई है. कश्मीर में आगे बढ़ने का रास्ता सूफीवाद है. ‘सूफीवाद प्यार एवं माफी का रास्ता है. हम लोग पत्थरबाजी करने वाले युवकों से बात करेंगे एवं कुरान, हदीस और महान सूफी संतों के हवाले से उन्हें हिंसा छोड़ने के लिए समझाने का प्रयास करेंगे.

रजा ने अलगाववादियों से बातचीत के सवाल पर कहा कि “आप उन लोगों से कैसे बात कर सकते हैं जो पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगा रहे है? हम लोग इसे मामले में बिल्कुल स्पष्ट हैं कि जैसे उनलोगों ने हाल में कुछ लोगों के साथ किया उस तरह से भगाए जाने के लिए हमलोग उनके दरवाजे नहीं जाएंगे.

India.com इनपुट के साथ


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