तिरुवंतपुरम | एक देश एक कर के स्लोगन के साथ पुरे देश में जीएसटी (गुड्स एंड सर्विस टैक्स) लागु हो चूका है. 30 जून की आधी रात को प्रधानमंत्री मोदी ने इसे लागु करते हुए कहा की जीएसटी से देश के विकास को और रफ़्तार मिलेगी. हालाँकि सरकार जीएसटी की चाहे कितनी भी तारीफ करे लेकिन अभी भी कुछ तबके ऐसे है जो इस नयी कर व्यवस्था से बिलकुल भी खुश नही है.

मसलन कपडा व्यापारी पिछले 15 दिनों से जीएसटी का विरोध कर रहे है. सूरत में तो पिछले दस दिन से बाजार बंद है और व्यापारी सड़क पर. ऐसा ही हाल लगभग पुरे देश का है. कपडा व्यापारी , गारमेंट्स पर टैक्स लगाने से नाराज है. उनका कहना है की नयी कर व्यवस्था से उनके व्यापर पर प्रतिकूल असर पड़ेगा. इसलिए व्यापारी लगातार आन्दोलन कर जीएसटी वापिस लेने की मांग कर रहे है.

उधर अब देश की आधी आबादी भी जीएसटी के विरोध में उतर गयी है. दरअसल सरकार ने सेनिटरी नैपकिन को लक्ज़री की श्रेणी में रखते हुए इस पर 12 फीसदी जीएसटी लगाने का फैसला किया जो महिलाओ को पसंद नही आया. इसलिए केरल की वामपंथी छात्र संघ कार्यकर्ताओ ने विरोधस्वरूप वित्त मंत्री अरुण जेटली को महिलाओ के सनिट्री नैपकिन भेजे है. उन्होंने डाक के जरिये इन नैपकिन्स को वित्त मंत्री के पास भेजा.

केरल की सत्तारूढ़ माकपा के छात्र संगठन, ‘स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ़ इंडिया’ ने सेनिटरी नैपकिन पर ब्लीड विदआउट फियर और ब्लीड विदआउट टैक्स लिखकर अरुण जेटली को भेजे. इसके अलावा SFI ने बुधवार को राज्य के लगभग सभी कॉलेजों में सरकार के फैसले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी किये. इन प्रदर्शनों में पार्टी के कई प्रदेश और जिला स्तर के नेताओ ने हिस्सा लिया.


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