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गजेंद्र चौहान के पुणे स्थित एफटीआईआई के अध्‍यक्ष पद संभालने के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे संस्‍थान के छात्रों पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। इसके साथ ही 40 छात्रों को हिरासत में भी ले लिया गया।

दरअसल, चेयरमैन पद के लिए चुने गए अभिनेता गजेंद्र चौहान सात महीने बाद अध्यक्ष पद संभाल रहे हैं। इसके विरोध में स्टूडेंट्स शांतिपूर्ण तरीके से मार्च करने का निर्णय लिया था और 17 स्टूडेंट्स को शांति मार्च में शामिल न होने देने के लिए नोटिस दिया गया था।

इस पद के लिए गजेंद्र के चयन को फिल्म संस्था के विद्यार्थियों के साथ ही सिनेमा जगत के कई लोगों से भी विरोध का सामना करना पड़ा है। आलोचकों ने इस पूरी नियुक्ति को राजनीतिक करार दिया था क्योंकि गजेंद्र चौहान केंद्र की बीजेपी सरकार के सदस्य हैं और उन्होंने लोकसभा चुनाव में पार्टी के लिए बढ़-चढ़ कर प्रचार किया था। आपत्ति इस हद तक बढ़ गई कि चार महीने तक एफटीआईआई के छात्र हड़ताल पर रहे और केंद्र सरकार के प्रतिनिधित्व से दिल्ली में मुलाकात भी की लेकिन उनकी मांग नहीं मानी गई। इसके बाद छात्रों ने हड़ताल समाप्त कर दी लेकिन साथ ही यह भी कहा कि वह शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जारी रखेंगे।

क्या है स्टूडेंट्स के विरोध की वजह…
2015 के सबसे विवादित मुद्दों में से एक एफटीआईआई मामला रहा जिसमें संस्था के नए अध्यक्ष की नियुक्ति पर छात्रों ने कड़ी आपत्ति जताई। अध्यक्ष पद के लिए अभिनेता गजेंद्र चौहान को चुना गया जिन्हें दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले ‘महाभारत’ में युधिष्ठिर के किरदार से ख्याति प्राप्त हुई थी। गजेंद्र चौहान की नियुक्ति के विरोध में स्टूडेंट्स हड़ताल पर चले गए जो 139 दिन चली और इसके बाद छात्रों ने कहा गजेंद्र चौहान की नियुक्ति के खिलाफ ‘शांतिपूर्ण’ विरोध जारी रहेगा।

इस पूरे विरोध के दौरान छात्रों के समर्थन में कई हस्तियां आगे आईं जिसमें निर्देशक दिबाकर बनर्जी, आनंद पटवर्धन सहित आठ कलाकारों ने आंदोलनकारी छात्रों के साथ एकजुटता दिखाते हुए और देश में बढ़ती असहिष्णुता के विरोध में अपने राष्ट्रीय पुरस्कार लौटा दिए।

 


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