रोहित वेमुला को न्याय दिलाने की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करते छात्र। इस आयोजन में अरविंद केजरीवाल और राहुल गांधी भी हुए शामिल।

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में हफ्तों से चल रहा छात्र आंदोलन अब कन्हैया की गिरफ्तारी और रोहित वेमुला की खुदकुशी से आगे निकल गया है। मंगलवार सुबह जेएनयू के गंगा ढाबे से से एक रैली निकाली गई, जो शाम तक जंतर-मंतर पहुंचते ही सभा में तब्दील हो गई। सभा में छात्रों की जगह अरविंद केजरीवाल और राहुल गांधी जैसे नेताओं ने ले ली और मंच पर ‘कैम्पस की स्वायत्तता बनाम मोदी सरकार’ की नई बहस छेड़ दी।

इस सभा में रोहित वेमुला की मां राधिका और भाई राजा ने भी हिस्सा लिया। इस दौरान सामूहिक बलात्कार की शिकार हुई निर्भया के लिए दामिनी-कानून बनाए जाने की तरह संसद से ‘रोहित-कानून’ बनाने की मांग की गई। मंच से संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण में रोहित की मौत और विभिन्न विश्वविद्यालयों में छात्रों को हो रही तकलीफ का जिक्र नहीं करने के लिए सरकार की आलोचना भी की गई। एक हफ्ते के भीतर मंगलवार को दूसरी बार देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के हजारों छात्र रोहित वेमुला की मौत और जेएनयू विवाद के खिलाफ राजधानी की सड़कों पर उतरे। छात्रों ने वेमुला की खुदकुशी के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया। छात्रों ने जेएनयू में पुलिस कार्रवाई की भी निंदा की और छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार की तुरंत रिहाई की मांग की।

सभा में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने मोदी सरकार और आरएसएस पर कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में असहमति की आवाज दबाने का आरोप लगाया। हैदराबाद विश्वविद्यालय के शोध छात्र रोहित वेमुला और कन्हैया कुमार के लिए इंसाफ की मांग करते हुए मार्च निकालने वाले छात्रों का समर्थन करते हुए राहुल ने कहा कि हमें यह सुनिश्चित करने के लिए कानून बनाना चाहिए कि कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में छात्रों को भेदभाव का सामना न करना पड़े और उनकी आवाज न दबाई जाए।

राहुल ने कहा कि इस तरह का दबाव रोकने का कानून लाने के लिए कांग्रेस लड़ाई लड़ेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार न केवल युवकों, बल्कि आदिवासियों, दलितों और अन्य कमजोर तबकों को भी दबाने का प्रयास कर रही है। राहुल ने कहा कि हम इस तरह का भारत नहीं चाहते, जहां हमारे ऊपर किसी खास विचारधारा को थोपा जाए। हम इसके खिलाफ लड़ रहे हैं। आरएसएस के लोग चाहते हैं कि भारत में एक विचारधारा हो, लेकिन हम चाहते हैं कि अलग-अलग आवाज और विचारधारा होे। मैंने संसद में राष्ट्रपति का अभिभाषण सुना। उन्होंने सरकार की उपलब्धियों के बारे में कहा, लेकिन रोहित के मुद्दे पर कुछ नहीं कहा, विश्वविद्यालयों में क्या हो रहा है इस पर उन्होंने कुछ नहीं कहा।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि रोहित का संघर्ष मरने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने केंद्र की कैम्पस नीति को आड़े हाथों लिया और कहा कि सरकार ने छात्रों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। यही वजह है कि डेढ़ साल के भीतर देश का युवा मोदी सरकार के खिलाफ खड़ा हो गया है। रोहित एक होनहार छात्र था। उसे समाज, सरकार और मंत्रियों ने खुदकुशी के लिए मजबूर किया, लेकिन उन दो मंत्रियों से अभी तक पूछताछ भी नहीं की गई है। केजरीवाल ने कहा कि केंद्र सरकार देश के छात्रों के साथ ‘युद्ध’ कर रही है। प्रधानमंत्री मोदी अपने रास्ते बदलें, नहीं तो छात्र उनको सबक सिखाएंगे।

प्रदर्शन में शामिल एक छात्र ने कहा कि वे रोहित और कन्हैया कुमार के लिए न्याय मांगते हैं। यह प्रदर्शन दलितों, अल्पसंख्यकों और वंचित तबके के लिए भी है। इस सौके पर आप नेता आशुतोष और संजय सिंह भी मौजूद थे। इसके अलावा जेएनयू और दिल्ली विश्वविद्यालय का पूरा परिसर उमड़ा था। उनका साथ देने के लिए जामिया मिल्लिया इस्लामिया और अंबेडकर विश्वविद्यालय के छात्र और पूर्व छात्रों का एक बड़ा हुजूम, एनएसयूआइ, एआइएसबी समेत आइसा, एसएफआइ और एआइएसएफ जैसे तमाम वामपंथी छात्र संगठनों की अगुवाई में मौजूद थे। इस मौके पर हैदराबाद विश्वविद्यालय और उस्मानिया विश्वविद्यालय के सैकड़ों छात्रों ने ‘जय भीम’ जैसे नारे लगाए और वेमुला के लिए न्याय की मांग की। (Jansatta)


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