बीजेपी के पक्ष में मुखर रहने वाले कम से कम छह जाने पहचाने चेहरे जल्द ही संसद के सदस्य हो सकते हैं। राज्यसभा के 12 मनोनीत सदस्यों में से सात की जगह खाली है और मोदी सरकार छह को भरने के करीब है।

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गौर हो कि  बीजेपी फिलहाल राज्यसभा में अल्पमत में है। राज्यसभा में 245 सीटें है जबकि बीजेपी के केवल 48 सदस्य हैं। यूपीए सरकार के दौरान राज्य सभा भेजे गए कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर, गीतकार जावेद अख्तर, गायिका बांबे जयश्री, शिक्षाविद मृणाल मिरी, योजना आयोग के पूर्व सदस्य भालचंद्र मुंगेकर, हिंदुस्तान लीवर के पूर्व चेयरमैन अशोक गांगुली और हिंदुस्तान टाइम्स के पूर्व संपादक एचके दुआ का कार्यकाल हाल ही में समाप्त हुआ है। दुआ और गांगुली का कार्यकाल पिछले साल 17 नवंबर को जबकि अन्य लोगों का कार्यकाल 21 मार्च को समाप्त हुआ था।

राज्यसभा के 12 सदस्यों को राष्ट्रपति मनोनित करते हैं. अक्सर कला, विज्ञान, साहित्य और सामाजिक कार्यों में ‘विशेष ज्ञान व व्यावहारिक अनुभव’ रखने वाले लोगों को राष्ट्रपति उच्च सदन में भेजते हैं.
आइए जानते हैं उनके बारे में जो जा सकते हैं राज्यसभा

अनुपम खेर

हाल में ही पद्म भूषण अवॉर्ड से सम्मानित अनुपम खेर की पत्नी किरण खेर पहले ही बीजेपी के टिकट पर लोकसभा सांसद है। खेर बीजेपी और विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुखर समर्थक हैं।  नवंबर, 2015 में खेर ने असहिष्णुता के खिलाफ अवॉर्ड वापसी अभियान का मुकाबला करने के लिए दिल्ली में मार्च निकाला था।

सलीम खान

शोले के सह लेखक सलीम खान को लंबे समय से पीएम मोदी का प्रबल समर्थक माना जाता है। पिछले साल सलीम खान उस वक्त सुर्खियों में आ गए थे जब उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ‘ईमानदारी से सब का साथ, सब का विकास में विश्वास रखते हैं’ और अगर मुसलमान भारत में रहना चाहते हैं तो उन्हें राष्ट्र और उसकी संस्कृति का सम्मान करना चाहिए।
हाल में ही ट्विटर से जुड़े सलीम खान ने अपने पहले तीन ट्विट में राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के मुखिया मोहन भागवत को सलाम कहा और गर्व से ‘भारत माता की जय’ कहा।

रजत शर्मा

इंडिया टीवी के एडिटर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के जनरल सेक्रेटी रह चुके हैं। एबीवीपी आरएसएस का छात्र संगठन है। आपातकाल के दौरान रजत शर्मा जेल में भी रह चुके हैं। बीजेपी के सत्ता में आने के बाद उनके चैनल ने सरकार समर्थक कवरेज को लेकर ध्यान खींचा है। विशेष तौर पर जेएनयू मेें कथित तौर पर ‘राष्ट्रविरोधी’ गतिविधियों को लेकर इंडिया टीवी की कवरेज की आलोचना कुछ हलकों में हुई है।

सुभाष चंद्रा

एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन और ज़ी न्यूज के मालिक एक बार फिर सक्रिय रूप से आरएसएस के साथ जुड़े हैं। उनके चैनल को जेएनयू विवाद में ‘विद्वेषपूर्ण कवरेज’ के लिए कड़ी आलोचना झेलनी पड़ी है. हालांकि, चंद्रा अतीत में कांग्रेस के करीब हो गए थे। मजेदार बात है कि चंद्रा ने ही पहली बार रजत शर्मा को ब्रेक दिया था। रजत शर्मा का विख्यात शो ‘आप की अदालत’ पहले ज़ी न्यूज पर शुरू हुआ था।

स्वप्न दासगुप्ता

पूर्व पत्रकार और समीक्षक को इनके दक्षिणपंथी झुकाव के लिए जाना जाता है।  वह खुद को ‘राजनीतिक रूप से रूढ़िवादी’ के तौर पर पेश करते हैं. उन्हें 2015 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया है। दासगुप्ता को नई दिल्ली स्थित नेहरू मेमोरियल के निदेशक बनने का प्रस्ताव भी दिया जा चुका है।
राकेश सिन्हा
दक्षिणपंथी थिंक टैंक इंडिया पॉलिसी फाउंडेशन के मानद निदेशक सिन्हा टीवी और दूसरे सार्वजनिक मंचों पर संघ परिवार के मजबूत रक्षक के तौर पर मौजूद रहते हैं।
आरएसएस की स्थापना करने वाले केबी हेडगेवार की जीवनी के लेखक राकेश सिन्हा गर्व के साथ ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद’ और ‘समतावादी सामाजिक व्यवस्था’ जो ‘राम और रोटी’ का ध्येय रखती है, के साथ खड़े होने का दावा करते हैं।
(साभार – liveindiahindi.com)

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