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तीन तलाक के विरोध में सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर मुस्लिम संगठनों की आलोचनाओं का सामना कर रही मोदी सरकार के खिलाफ अब बरेली की विश्व प्रसिद्ध दरगाह आला हजरत से भी मौर्चा खोल दिया हैं.

दरगाह आला हजरत से सुन्नी सूफी उलेमाओं ने ऐलान किया हैं कि जिस तरह से इंदिरा गाँधी के नसबंदी क़ानून का विरोध किया गया था उसी तर्ज पर अब नरेन्द्र मोदी की समान नागरिक संहिता का भी विरोध किया जाएगा.

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 ‘उर्स-ए-नूरी’ की शुरुआत के मौके पर दरगाह आला हजरत में हुई बैठक में दरगाह आला हजरत के पूर्व सज्जादानशीं एवं संरक्षक मुफ्ती अख्तर रजा खां उर्फ अजहरी मियां ने कहा कि ”तीन तलाक तीन ही मानी जाएंगी. एक साथ तीन बार कही गयी तलाक को एक तलाक ही मानने की केन्द्र की दलील और इससे जुड़ा हलफनामा दायर किया जाना शरीयत में सीधा हस्तक्षेप होगा, जो कुबूल नहीं किया जाएगा.

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अजहरी मियां ने आगे कहा कि ”कुरान और हदीस के मुताबिक तीन तलाक सैद्घांतिक रूप से दुरुस्त है, लेकिन एक सांस में ही तीन बार तलाक बोलने को इस्लाम में कभी अच्छा नहीं माना गया है. इसी धारणा पर शरई अदालत में मुसलमानों के फैसले होते रहे हैं.”


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