दंगों के कारण मुस्लिमों के बीच ‘डर की भावना’ होने की बात पर गौर करते हुए सूफियों का प्रतिनिधित्व करने वाले एक संगठन ने रविवार को सरकार से इसका उन्मूलन करने को कहा।

दंगों के कारण मुस्लिमों के बीच ‘डर की भावना’ होने की बात पर गौर करते हुए सूफियों का प्रतिनिधित्व करने वाले एक संगठन ने रविवार को सरकार से इसका उन्मूलन करने को कहा। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भारत में ‘ऐतिहासिक भूलों’ में सुधार करने का भी आग्रह किया जिसने अतिवादी विचारधाराओं को जगह लेने दी, जो सूफी समुदाय के लिए खतरा है। अखिल भारतीय उलेमा एवं मशेख बोर्ड (एआईयूएमबी) ने मोदी सरकार समेत दुनियाभर की सरकारों से अनुरोध किया कि वे सूफी धर्म को पुनर्जीवित करें ताकि आतंकवाद से लड़ा जा सके।

प्रथम विश्व सूफी मंच की बैठक के समापन पर एआईयूएमबी ने 25 सूत्री घोषणा पत्र जारी किया जिसमें में कहा गया है, ‘दंगों की वजह से मुस्लिमों में डर की भावना है। सरकार को इस डर को दूर करना चाहिए और केंद्रीय गृह मंत्रालय को बताना चाहिए कि देश के विभिन्न हिस्सों में अब तक हुई सभी छोटी या बड़ी सांप्रदायिक घटनाओं और दंगों के संबंध में क्या कदम उठाए गए हैं।’

अशरफ ने प्रधानमंत्री मोदी से ‘ऐतिहासिक भूलों को सुधारने’ और सूफी धर्म की जगह अतिवादी विचारधारा के ले लेने की प्रवृत्ति से निपटने के लिए कदम समेत उठाने की समुदाय की मांगों पर ध्यान देने को कहा। अशरफ ने इस बात को लेकर चिंता जताई कि भारत में सूफी धर्म को कमजोर करने और अतिवादी और चरमपंथी विचारधाराओं के उनकी जगह लेने के लिए ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने सरकार से इस प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने के लिए हस्तक्षेप करने की मांग की।

उन्होंने कहा, ‘विगत कुछ दशकों में भारत में सूफी मत को कमजोर करने और अतिवादी और चरमपंथी विचारधारा के उसकी जगह लेने के ठोस प्रयास किए गए हैं—यह परिघटना न सिर्फ मुस्लिम समुदाय के लिए बल्कि देश के लिए भी खतरनाक है। हम प्रधानमंत्री से इन ऐतिहासिक भूलों को दूर करने का अनुरोध करते हैं।’

अशरफ ने कहा कि महत्वपूर्ण पदों पर मुस्लिम आबादी के पर्याप्त प्रतिनिधित्व का अभाव है और उन्होंने सरकार से इसपर गौर करने को कहा। संगठन ने संप्रदायवाद के हर स्वरूप की निंदा की और इसे भारत की एकजुटता के लिए खतरा बताया।

संगठन ने कहा, ‘हम दुनिया की सभी सरकारों और खासतौर पर भारत सरकार से अनुरोध करते हैं कि वह सूफीधर्म को पुनर्जीवित करने के लिए पूरा सहयोग दें।’ असहिष्णुता के माहौल के बारे में पूछे जाने पर अशरफ ने कहा, ‘कुछ घटनाओं के आधार पर हम तस्वीर निर्धारित नहीं कर सकते।

हमें इसे चिंता का विषय मानना चाहिए। हमें इस बात को सुनिश्चित करने का प्रयास करना चाहिए कि हमारी गंगा-जमुनी संस्कृति प्रभावित नहीं हो क्योंकि इसके कमजोर होने को लेकर संकेत हैं। तब हमें इसे मजबूत करने का प्रयास करना चाहिए।’ चार दिवसीय विश्व सूफी मंच का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उद्घाटन किया और इसमें 22 देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। यह एआईयूएमबी के 25 सूत्री एजेंडा जारी करने के साथ समाप्त हुआ। (Jansatta)


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