भारत के प्रमुख क़ानूनदां और पूर्व अटॉर्नी जनरल सोली सूराब जी ने इंडिया टुडे को साक्षात्कार देते हुए जेएनयू विवाद पर जारी हंगामे के दौरान स्पष्ट किया कि ‘अफजल गुरु की फांसी को गलत कहना या पाकिस्तान समर्थक नारे लगाना देशद्रोह के संदर्भ में नहीं आता, हाँ यह दुखद जरूर है।’

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उन्होंने देशद्रोह के संदर्भ में लगाया जाने वाली धारा का अर्थ समझाते हुए कहा कि सरकार से किसी बात पर विवाद या उसके विरूद्ध प्रदर्शन देशद्रोह के अंतर्गत नहीं आते लेकिन इस विवाद के लिए किसी को हिंसा पर भड़काना देशद्रोह है और इस पर धारा के तहत मामला चलाया जा सकता है।

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उन्होने स्पष्ट शब्दों में समझाते हुए कहा ‘इसको मै उदाहरण के माध्यम से समझाता हूँ कि अगर कोई कहता है कि अफजल गुरु की फांसी गलत थी तो यह देशद्रोह कतई नहीं है लेकिन अगर कोई यह कहे कि अफजल गुरु की फांसी का बदला लिया जाएगा तो यह देशद्रोह के संदर्भ में आएगा और ऐसे तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।’ (hindkhabar)

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