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नई दिल्ली। संसदीय समिति ने भारतीय सेना के ‘बड़े पैमाने पर पुराने हथियारों’ को लेकर चिंता जताते हुवे सेना के आधुनिकीकरण में सुस्ती पर सरकार की खिंचाई की है। रक्षा संबंधी संसद की स्थायी समिति ने संसद के दोनों सदनों में प्रस्तुत रिपोर्ट में कहा कि, ‘‘समिति चिंतित है कि हमारी सेनाएं बड़े पर पुराने उपकरणों के साथ काम कर रही है।’’

आगे रिपोर्ट में कहा गया कि, ‘‘इसके अलावा गाडिय़ों, छोटे हथियारों, तोपखाने के हथियारों, निगरानी उपकरणों, सिगनल और कम्युनिकेशन उपकरणों, राडार और बिजली के उपकरणों और जनरेटर आदि की काफी कमी सेना झेल रही है।’’ सरकार ने रक्षा तैयारियों को लेकर समिति द्वारा उठाए गए सवालों के जवाब में कहा, ‘‘आदर्श रूप में अत्याधुनिक मौजूदा और पुराने हथियार और उपकरण 30:40:30 के अनुपात में होने चाहिए और इसे प्राप्त करने के प्रयास किए जा रहे हैं।’’

सरकार ने कहा, ‘‘सेनाओं का आधुनिकीकरण और क्षमता विकास एक सतत और गतिशील प्रक्रिया है, जोकि संचालन आवश्यकताओं और खतरे के स्तर पर आधारित होती है।’’ समिति ने इस जबाव को ‘नौकरशाही की प्रकृति’ का जवाब करार दिया है। समिति ने कहा कि सैन्यकर्मियों की संख्या में वृद्धि, आधुनिक और परंपरागत हथियारों के सही मात्रा में खरीद, गोला-बारूद और बुनियादी ढांचे के विकास आदि चिरस्थाई समस्या है और उन्हें हल करने के लिए कोई ठोस कार्रवाई शुरू की गई हो, ऐसा नहीं दिखता है।


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