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नई दिल्ली | प्रधानमंत्री मोदी की कालेधन और भ्रष्टाचार खत्म करने की मुहीम में बंद किये गए 500 और 1000 के नोट , देश में कालेधन और भ्रष्टाचार पर वार करने के लिए कितना कारगार होंगे , यह तो वक्त ही बतायेगा, लेकिन इसका फायदा कुछ दुकानदारों को मिलना जरुर शुरू हो गया है. खबर मिली है की कुछ दुकानदार , बंद किये नोट के बदले में खुले पैसे देने के लिए तैयार है लेकिन इसके लिए वो कुछ अतरिक्त रकम वसूल रहे है.

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अमर उजाला में छपी खबर के मुताबिक उनकी टीम जब एक शहर का जायजा लेने पहुंची तो वहां उनको काफी चौकाने वाले दर्शय दिखाई दिए. बताया जा रहा है की निम्न दर्जे के वो लोग जो रोजाना दिहाड़ी कर अपना जीवन यापन करते है, उनके पास न तो कोई आईडी है और न ही कोई बैंक अकाउंट. ऐसे में ये लोग, कैसे अपने 500 या 1000 नोट को बैंक से बदल पायेंगे. वैसे भी इनके पास इतनी भारी मात्र में तो यह नोट नही होंगे.

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ऐसे में अपने परिवार का पालन पोषण करने के लिए इनको पैसे कहाँ से मिलेंगे. इसी बात का फायदा , कुछ दुकानदार उठा रहे है. ये दुकानदार इन लोगो से 500 या 1000 रूपए का नोट लेते है और बदले में इनको 100 रूपए कम दिया जाता है. मोदी सरकार के फैसले की बड़ी मार अगर किसी तबके पर पड़ी है तो वो निम्न तबका है. ज्यादातर ,इस तबके के लोगो के पास न आईडी है और न ही अकाउंट नम्बर.

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अमर उजाला की खबर के अनुसार, कुछ बस कंडेक्टर भी 500 रूपए का नोट स्वीकार नही कर रहे है. कंडक्टर पहले ही यात्रियों से पूछ लेता है की उनके पास 500 का नोट तो नही है. तमाम सरकारी वादों के बावजूद , कुछ अस्पताल और बस कंडक्टर , 500 और 1000 के नोट स्वीकार नही कर रहे है. आज देश में आर्थिक आपातकाल जैसे हालात है. कल बैंक खुल जायेंगे , देखते है कल क्या होता है?


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