-स्मृति इरानी की सिफारिश पर आर्किटेक्ट शिल्पी तिवारी को बना दिया गया था कंसल्टेंट

वाराणसी -यह बात आश्चर्यजनक मगर सच है कि जेएनयू के मामले में फर्जी वीडियो बनाने के आरोपों से चर्चा में आई शिल्पी तिवारी को ट्विटर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी फालो करते हैं। गौरतलब है कि दिल्ली सरकार की ओर से कराई फोरेंसिक जांच में पता चला है कि वीडियोज के साथ छेड़छाड़ की गई थी।प्रधानमन्त्री मोदी के अलावा मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति इरानी और अन्य कई केन्द्रीय नेता शिल्पी के फालोवर

सोशल मीडिया से लापता है शिल्पी
जेएनयु �मामले से चर्चा में आई �केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की करीबी शिल्पी तिवारी पिछले एक सप्ताह से सोशल मीडिया से लापता है,उन्होंने 27 फरवरी को अंतिम बार ट्विटर पर एक स्टेटस डाला है जिसमे वो कह रही है कि मैं कुछ दिनों के लिए कहीं और जा रही हैं।महत्वपूर्ण हैं कि फोरेंसिक रिपोर्ट में तीन वीडियो ऐसे हैं जिन पर संदेह जताया गया है, इनमें से एक का सीधा संबंध शिल्पी तिवारी से बताया गया है,इनमें से दो संदेहास्पद वीडियो शिल्पी तिवारी के ही एकाउंट से जारी हुए थे। किसी समय आर्किटेक्ट रह चुकी शिल्पी तिवारी अपने पति के साथ मिलकर एक कंसल्टेंसी फर्म चलाया करती थी और अन्ना आन्दोलन में भी इन्होने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था।
नियम कायदों को तोड़कर दे दी गई थी मानव संसाधन मंत्रालय में नियुक्ति�
दिलचस्प यह कि मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति इरानी �के समर्थन में शिल्पी तिवारी ने 15 मई 2015 को एक विदेशी अखबार में एक लेख लिखा था,जिसमे पूर्व केन्द्रीय मंत्री शशि थरूर के उस बयान की जम कर आलोचना की गई थी जो उन्होंनेदेश में शिक्षा व्यवस्था की बदहाली �को लेकर लिखा था।आश्चर्यजनक तौर से 20 मई 2015 को स्मृति इरानी के एक प्रस्ताव पर मुहर लगाते हुए शिल्पी तिवारी को मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले उच्च शिक्षा विभाग में अस्थायी तौर पर बतौर कंसल्टेंट नियुक्ति भी प्रदान कर दी गई।
twitter account of shilpi
शिल्पी का वीडियो गेम
शिल्पी ने पहला वीडियो 10-2-2016- यह वीडियो यू ट्यूब एकाउंट से शेयर किया था ,लेकिन इसमें शिल्पी का नाम नहीं था। viडियो में “गो इंडिया गो बैक ” और भारत की बर्बादी तक जंग रहेगी” जैसे नारे थे.
दूसरा वीडियों 13 फरवरी को शेयर किया गया जिसे शिल्पी ने खुद अपलोड किया था इस वीडियो में भी “गो इंडिया गो बैक ” और भारत की बर्बादी तक जंग रहेगी” जैसे नारे थे।
तीसरा वीडियो शिल्पी ने 14 फरवरी को शेयर किया जिसमे “अफजल हम शर्मिंदा हैं तेरे कातिल जिन्दा हैं और भारत तेरे टुकड़े होंगे जैसे नारे थे।
चौथा वीडियो शिल्पी ने 20 फरवरी को शेयर किया जिसे उसने खुद अपलोड किया था और जिसमे कन्हैया कुमार को नारे लगते देखा जा सकता है। जिसके बारे शिल्पी ने दावा किया कि यहाँ कन्हैया को नारे लगाते देखा जा सकता है।
पांचवा वीडियो 20 फरवरी को शिल्पी के द्वारा अपलोड किया गया ,जिसमे नकाब लगाए कुछ लोग ” बन्दूक के दम पर आजादी के नारे लगा रहे हैं और जिसके अंत में कन्हैया कुमार भी आ जाता है।
22 फरवरी को शिल्पी तिवारी ने तीन वीडियो शेयर किया थे जिनमे से दो वीडियो शिल्पी द्वारा खुद अपलोड किये गए थे।जिनमे कितने अफजल मारोगे हर घर से अफजल निकलेगा और अफजल हम शर्मिंदा हैं तेरे कातिल जिन्दा हैं जैसे नारे थे।

हैरतंगेज यह था कि इस पद पर शिल्पी की  नियुक्ति में उन्हें वांछित योग्यता में भी छूट दे दी गई। लेकिन बताया जाता है कि शिल्पी ने इस नियुक्ति को विवाद के घेरे में आने के बाद अस्वीकार कर दिया था।सोशल एक्टिविस्ट मधु किश्वर ने भी उनकी नियुक्ति पर सवाल खड़े किये थे।
पीएम को जेएनयू मुद्दे पर खामोश रहने का दिया था सुझाव
जेएनयू के मुद्दे पर सभी बड़े मीडिया हाउस और पत्रकारों को वीडियोज उपलब्ध कराने में शिल्पी तिवारी का बड़ा रोल था अपने ट्विटर एकाउंट से उसने देश के कई चर्चित पत्रकारों को टैग करके वीडियो सन्देश भेजे थे और इस पूरे मामले वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण पर हमला करने वाले तेजिंदर पाल सिंह बग्गा के अलावा कई अन्य लोग उसके साथ थे। शिल्पी तिवारी ने 17 फरवरी को पीएम मोदी को टैग करके एक ट्विट किया था जिसमे उनसे जेएनयू मुद्दे पर खामोश रहने के लिए कहा गया था ,शिल्पी ने अपने मेसेज में कहा था कि कुछ बोलने से यह लड़के हीरो बन जायेंगे।
खेल फर्जी वीडियो का
जेएनयू से जुड़े q1 और q2 रिकॉर्डिंग की फोरेंसिक जांच में लिप सिंक में फर्क नजर आया है। इससे पता चलता है कि ऑडियो स्ट्रीम ऑरिजनल रिकॉर्डेड विडियो का हिस्सा नहीं है। इसलिए विडियो में जो बातचीत सुनाई दे रही है, प्रामाणिक नहीं है और वह कहने वालों की असल आवाज से मेल नहीं खाती।जेएनयू मामले से जुड़े वीडियो q2 रिकॉर्डिंग का संबंध शिल्पी तिवारी के सोशल मीडिया ट्विटर वाले यूजर अकाउंट से है। रिपोर्ट के मुताबिक, इसलिए यह नतीजा निकाला जाता है किq1 और q2 रिकॉर्डिंग प्रामाणिक ऑडियो और विडियो स्ट्रीम नहीं हैं। ये अलग अलग जगहों से लिए गए हैं, जिनको इस मकसद से एक-दूसरे में मिला दिया गया है कि ये रिकॉर्डिंग असल कार्यक्रम की नजर आएं। दिल्ली सरकार ने इस मामले की जांच के लिए 18 फरवरी को पांच विडियो और 22 जनवरी को दो विडियो दिए थे।
शिल्पी का वीडियो गेम
शिल्पी ने पहला वीडियो 10-2-2016- यह वीडियो यू ट्यूब एकाउंट से शेयर किया था ,लेकिन इसमें शिल्पी का नाम नहीं था। viडियो में “गो इंडिया गो बैक ” और भारत की बर्बादी तक जंग रहेगी” जैसे नारे थे।
दूसरा वीडियों 13 फरवरी को शेयर किया गया जिसे शिल्पी ने खुद अपलोड किया था इस वीडियो में भी “गो इंडिया गो बैक ” और भारत की बर्बादी तक जंग रहेगी” जैसे नारे थे।
तीसरा वीडियो शिल्पी ने 14 फरवरी को शेयर किया जिसमे “अफजल हम शर्मिंदा हैं तेरे कातिल जिन्दा हैं और भारत तेरे टुकड़े होंगे जैसे नारे थे।  चौथा वीडियो शिल्पी ने 20 फरवरी को शेयर किया जिसे उसने खुद अपलोड किया था और जिसमे कन्हैया कुमार को नारे लगते देखा जा सकता है। जिसके बारे शिल्पी ने दावा किया कि यहाँ कन्हैया को नारे लगाते देखा जा सकता है।
पांचवा वीडियो 20 फरवरी को शिल्पी के द्वारा अपलोड किया गया, जिसमे नकाब लगाए कुछ लोग ” बन्दूक के दम पर आजादी के नारे लगा रहे हैं और जिसके अंत में कन्हैया कुमार भी आ जाता है। 22 फरवरी को शिल्पी तिवारी ने तीन वीडियो शेयर किया थे जिनमे से दो वीडियो शिल्पी द्वारा खुद अपलोड किये गए थे। जिनमे कितने अफजल मारोगे हर घर से अफजल निकलेगा और अफजल हम शर्मिंदा हैं तेरे कातिल जिन्दा हैं जैसे नारे थे। (patrika)

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