शरीयत कानून को अवैध कानून घोषित करने के लिए केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई हैं. गुरुवार को केंद्र सरकार ने संविधान के आर्टिकल 13 के तहत शरीयत कानून को अवैध कानून घोषित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से निवेदन किया हैं.

केंद्र सरकार की और से मांग की गई हैं कि  कोर्ट ये जांच करे कि क्या ‘पर्सनल लॉ संविधान के तहत कानून है.’ कोर्ट से आग्रह किया गया कि क्या तीन तलाक और एक से अधिक विवाह इस्लाम के मूल तत्व हैं ? साथ ही क्या इन्हें देश के संविधान के तहत मुस्लिमों को मिले धर्म की आजादी के अधिकार के तहत संरक्षण हासिल है.

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इसी के साथ केंद्र सरकार यह भी चाहती है कि सुप्रीम कोर्ट यह जांच करे कि क्या धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार संविधान के तहत महिलाओं को मिले समानता और सम्मान के साथ जीने के अधिकार से ऊपर है. इन सभी सवालों के जवाब के लिए पांच जजों की संविधान पीठ गठित हो सकती है.

चीफ जस्टिस जे.एस. खेहर ने इस मामले से जुड़े सभी पक्षों को सुनवाई के लिए अपने सवाल तैयार करने को कहा है. जस्टिस खेहर अगस्त में रिटायर हो रहे हैं और उन्होंने संकेत दिया है कि वह इस मामले की जल्द सुनवाई चाहते हैं.

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