Shujaat Ali Quadri• एमएसओ ने दी प्रदर्शन की चेतावनी
• देश के मुस्लिम छात्र शाह से नाराज़
• सैयद सालार मसूद का अपमान का मामला
• अमित ने संत मसूद की तुलना आक्रांता से की

नई दिल्ली, 26 फ़रवरी। भारत के मुसलमान छात्रों की सबसे बड़ी प्रतिनिधि संस्था मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइज़ेशन यानी एमएसओ ने अमित शाह के उस बयान की आलोचना की है जिसमें उन्होंने बहराइच के महान् सूफ़ी संत सैयद सालार मसूद ग़ाज़ी मियाँ की तुलना एक आक्रांता से की। संगठन ने अमित शाह को सलाह दी है कि वह तुरन्त देश, मुसलमानों और हज़रत सैयद सालार मसूद ग़ाज़ी मियाँ से माफ़ी माँगें।

एमएसओ के राष्ट्रीय महासचिव इंजीनियर शुजात अली क़ादरी ने कहाकि वह स्वयं बहराइच से आते हैं और बचपन से देखते आए हैं कि सैयद सालार मसूद ग़ाज़ी मियाँ की दरगाह पर लाखों श्रद्धालु आते हैं जिनमें दलित और पिछड़ी जातियों के लोग बहुसंख्या में होते हैं। दरअसल इस क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी को कभी स्थाई सफलता नहीं मिली जिसके लिए भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सैयद सालार मसूद ग़ाज़ी मियाँ के उर्स के मौक़े पर कई बाहरी क्षेत्रों मे कैम्प लगाकर लोगों को दरगाह नहीं जाने के लिए बरग़लाते हैं लेकिन लोगों की श्रद्धा पर इसका कोई असर नहीं पड़ता। क़ादरी ने कहाकि सैयद सालार मसूद ग़ाज़ी मियाँ के दर पर लाखों लोग अपनी मन्नतें मानने के लिए आते हैं और ग़ाज़ी मियाँ एक महान् सूफ़ी संत की दरगाह है। कादरी ने कहाकि उनके संगठन में 10 लाख सूफ़ी छात्र सदस्य हैं और वह अमित शाह के बयान के बाद से काफ़ी भड़के हुए हैं। संगठन का मानना है कि अमित शाह को तुरंत देश, मुसलमान और सैयद सालार मसूद ग़ाज़ी मियाँ से माफ़ी माँगनी चाहिए क्योंकि उन्होंने समाज की भावनाओं को ठेस पहुँचाई है।

क़ादरी ने कहाकि जिस प्रकार इससे पहले वर्षों तक हज़रत सैयद सालार मसूद के प्रति नफ़रत फैलाने और श्रद्धालुओं को दरगाह में आने से रोकने के प्रयास विफल हुए हैं, इस बार भी साम्प्रदायिक ताक़तों को मुँहतोड़ जवाब मिलेगा। क़ादरी ने अमित शाह के बयान के बाद सभी सदस्य छात्रों और युवाओं से धैर्य रखने की अपील की है। यह पूछने पर कई सूफ़ी नेता तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिले हैं और प्रधानमंत्री ने सूफ़ीवाद को इस्लाम की सही धारा बताया है, इसके जवाब में शुजात अली क़ादरी ने कहाकि यदि प्रधानमंत्री अपने बयान पर क़ायम हैं तो उन्हें अमित शाह से माफ़ी मँगवानी चाहिए साथ ही साथ जो सूफ़ी नेता प्रधानमंत्री के सम्पर्क में हैं उन्हें भी अमित शाह के बयान की आलोचना कर शाह की सार्वजनिक माफ़ी की माँग करनी चाहिए। यह पूछने पर कि यदि दोनों ही परिस्थितियाँ साकार नहीं होती हैं तो एमएसओ का क्या रुख़ होगा, इसके जवाब में शुजात ने कहाकि देश भर के मुसलमानों विशेषकर सूफ़ी समाज के बीच अमित शाह के ग़ैर ज़िम्मेदार बयान के बारे में बताया जाएगा और सभी राज्यों में प्रतीक्षित चुनावों में इसका जवाब दिया जाएगा।


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