धर्मगुरू एवं सूफी संत हजरत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ति के वंशज एवं वंशानुगत सज्जदप्नशीन दरगाह के आध्यात्मिक प्रमुख दीवान सैयद जैनुल आबेदीन अली खान ने कहा कि कश्मीर के पत्थरबाज देशद्रोही तो है ही इन पत्थरबाजो से भी बड़े देशद्रोही है अलगाव वादी नेता जो इन्हें पत्थरबाजी के लिए उकसाते है और आतंकवादियो को भगाने में मदद करते है इन पर नकेल कसना जरुरी है। हिंसा किसी भी बात का हल नहीं हो सकती इसे सभी नेता बखूबी समझते है पर अपने निहित स्वार्थो के लिए अलगाववादी नेताओ के सुर में सुर मिलाने लगते है।
दरगाह दीवान ने ख्वाजा साहब के धर्म गुरू हजरत ख्वाजा उस्मान हरवनी के उर्स के मोके पर देश के विभिन राज्यों से आए जायरिनो को संभोधित करते हुए  कश्मीर के नोजवानो के नाम अपना पेगाम जारी करते हुए  कहा कि कश्मीर के मीरवायज जैसे नेता असल गुनहगार व देशद्रोही है जो कश्मीरी युवको को भड़का कर पाकिस्तान के मंसूबो को साकार कर रहे है अगर भारत सरकार ऐसे अलगाववादी नेता जेसे लोगो पर नकेल डाल दे तो कश्मीर समस्सया तुरंत हल हो जायेण् इन्ही की शह पर आतंकवादीयो  ने कश्मीर में स्कूल व कॉलेज जलाये और बंद करवाए ताकि एक पूरी की पूरी पीढ़ी को अनपढ़ रखा जाये और इस अनपढ़ पीढ़ी के जरिये पाकिस्तान समर्थित एजेंडे को लागू कर कश्मीर को भारत से अलग किया जा सकेण् ये वही नेता है जिनके अपने बच्चे विदेशो में रह कर उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे है।
उन्होने कहा कि अफसोस भारत की कुछ राजनैतिक पार्टिया तथा राजनेता इस पर जम कर राजनीति कर रहे है जो सिर्फ अफसोसजनक ही नहीं बल्कि शर्मनाक भी है कश्मीर के अलगाववादी नेता सही मायनो में देश के दुश्मन है जो बेरोजगार कश्मीरी युवायो को पत्थरबाज बना कर कश्मीर को भारत से अलग करना चाह रहे है। अलगाववादी नेताओ को भी मालूम है कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है जिसे कोई अलग नहीं कर सकता फिर ये नेता ऐसे क्यों कश्मीरी युवको को भड़का रहे है घ् इसका सिर्फ एक कारण है और वो कारण है जलते हुए कश्मीर में अपना खुद का एजेंडा चलाना और अपनी राजनैतिक रोटिया सेंकना।
दरगाह दीवान ने कहा कि कश्मीर में ऐसे बहुत लोग हैंए जो सूफ़ी  मत का विस्तार चाहते हेश्। संस्थागत समर्थन नहीं होने के कारण वे मजबूरन चुप रहते हैं और चरमपंथ के विस्तार का विरोध नहीं कर पाते। इसलिए सरकारी संस्थाएं पाकिस्तान के छद्म प्रतिनिधियों और कश्मीर में चरमपंथियों से जन सहभागिता के साथ निपट सकती हैं। भारत  सरकार को उग्रवाद आतंकवाद निरोधक अभियानों तथा पत्थरबाजों एवं राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के दमन के मामलों में किसी तरह का समझौता नहीं करना चाहिए। बातचीत में कोई अछूत नहीं होता। स्थिति स्थिर करने के लिए सबसे पहले सभी राजनीतिक दलों को साथ मिलकर काम करना होगा।
उन्होने कहा कि कश्मीर की असंतुष्ट जनता विशेषकर युवाओं को यह संदेश देने की जरूरत है कि श्अपने विचार बुलंद करेंए मुट्ठियां नहीं। विश्वासए आस्था एवं धर्म की धारणाओं से निकलने वाले तर्कों में अंतर हो सकता हैए लेकिन इसे घृणा में परिवर्तित नहीं होना चाहिए। दरगाह दीवान ने कहा कि कई खूंखार पाकिस्तानी आतंकवादियों को पकड़ने के लिए जम्मू.कश्मीर में सुरक्षा बलों और सेना ने खूब मेहनत की हैए लेकिन उनमें से एक भी मामले में तार्किक परिणति देखने को नहीं मिली है और किसी को भी देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने के आरोप में सजा नहीं मिली है। ऐसे में पुलिस तथा अन्य सरकारी संस्थाओं ने मान लिया है कि दोषी खुलेआम घूमते रहेंगे और राष्ट्र की सेवा करने के कारण उनके परिवारों को आतंकवादियों तथा उनके समर्थकों के हाथों सजा झेलनी होगी। जवाबदेही केवल पुलिस की नहीं है बल्कि सरकार के अन्य अंगों की भी है।
दरगाह दीवान  ने यह भी कहा की इस्लाम एक एसा मजहब है जो संपूर्ण मानव जाति के लिए प्रकाश स्तंभ के रूप में उभरा है इस्लाम जाति एवं संप्रदाय के आधार पर भेदभाव के खिलाफ है तथा श्वेत अश्वेत सभी नस्लों के साथ समानता में विश्वास करता है उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को समाज में व्यक्ति की हैसियत जाति एवं मत के आधार पर दुर्भावना ग्रस्त नहीं होना चाहिए क्योंकि सारे इंसान आदम की औलाद हैं तथा यह तथ्य सारी शंकाओं को दरकिनार करते हुए यह स्थापित करता है कि इस्लाम एक शांति का मजहब है। यह प्रेम एवं शांति का प्रतिनिधित्व करता है और हर व्यक्ति को विश्व में दूसरों के लिए समस्या तथा अराजकता पैदा नहीं करनी चाहिए अतः जो आतंक फैलाने में विश्वास करते हैं उनका समाज में कोई स्थान नहीं है हाबिल और काबिल की घटना सर्व विदित है जिसमें हाबिल ने काबिल की हत्या कर दी तथा यह कहा गया कि बाद की सभी हत्याओं की जिम्मेदारी का बोझ उसी व्यक्ति पर आएगा जिसने पहली घटना को अंजाम दिया या घटना के लिए उकसाया इस लिय आज कश्मीर जो जल राहा है अफसर जो लोगों की हिफ़ाज़त में रात दिन लगे है अलगावादी अपने समर्थकों से उन ही को जान से मारने पर तुले ह है श् इस लिए कश्मीर के मोजूदा हालात के लिए सिर्फ़ और सिर्फ़ अलगावादी ही ज़िम्मेदार है।
दरगाह दीवान ने कहा की इस्लाम में बताया गया है कि यदि लड़ाई की जरूरत पड़ती भी है तो इस से बच्चों औरतों बुजुर्गों और खड़ी फसलों को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए । वर्तमान परिवेश में देश भर में होने वाली आतंकी घटनाओं को इंगित करते हुए कहा कि इस्लाम विभाजन की इजाजत नहीं देता है और सभी की सलामती में विश्वास करता है । इस्लाम को बदनाम करने के लिए फैलाई जा रही अफवाहों से  अलग  इस्लाम का फैलाव इख़लक रहम विश्व बंधुत्व तथा इसके अनुयायियों के बीच प्यार के आधार पर हुआ है। आज भारत में आई एस आई एस मॉडल कामयाब नहीं हो सका  और  ना ही होगा क्योंकि हिंदुस्तान के मुसलमान अलग स्वभाव के हैं। हिंदुस्तानी मुसलमान धैर्यवान संवेदनशील सहिष्णु  है और वे भाईचारे में विश्वास करते हैं तथा यह मुस्लिम धर्मगुरुओं की जिम्मेदारी है कि वह आई एस आई एस और उसके दुष्प्रचार से संबंधित भ्रांतियों को दूर करें ओर साथ ही साथ अलगाववादी जेसे देशद्रोही लोगों का सामाजिक बहिष्कार करने की अपील करे  और  हर कश्मीरी की जिम्मेदारी बनती है कि वह अपने अच्छे आचरण से इस्लाम के वास्तविक स्वरूप को पूरे विश्व को दिखाए अपने अपने बच्चो के लिए यह सुनिश्चहित करे की वह पत्थरबाजी और अन्य देश विरोधी गतिविधियाँ छोड़े  सुनिश्चित् करे की युवा अच्छी से अछी तालीम हासिल कर ख़ुद को ख़ुद के परीवार को तरक़्क़ी के मार्ग पर  अग्रसर कर के अलगाववादी एवं अन्य आतंकी संगठनो को मुँह तोड़ जवाब देकर हुबुल वतनी की मिसाल क़ायम करे
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