देश के सबसे बड़े सार्वजनिक बैंक ने नोटबंदी को देश की अर्थव्यवस्था के चौपट होने की सबसे बड़ी वजह करार देते हुए कहा कि अब भी देश की अर्थव्यवस्था को धीमा करने और कारोबार पर विपरीत प्रभाव डालने पर नोटबंदी का प्रभाव बना रह सकता है.

एसबीआई ने निजी नियोजन के माध्यम से 15,000 करोड़ रुपये जुटाने से पहले अपने सांस्थानिक निवेशकों को सूचना देने वाले दस्तावेज में कहा था कि भारतीय अर्थव्यवस्था और बैंकिंग क्षेत्र पर नोटबंदी का दीर्घकालिक प्रभाव अनिश्चित है. लेकिन इससे बैंक के कारोबार पर विपरीत प्रभाव पड़ने की आशंका है.

बैंक ने कहा कि इसके चलते परिचालन और वित्‍तीय परिस्थितियों पर भी प्रभाव होगा. बैंक का यह निर्णय 15 जून से लागू होगा. जिसमें सेलेरी प्राप्त करने वाले कामकाजी महिलाओं को संशोधित ब्याज दर 8.55% सालाना होगी, जबकि दूसरे के लिए यह 8.60% सालाना होगा.

उल्लेखनीय है कि सरकार ने आठ नवंबर 2016 को 500 और 1000 रुपए के पुराने नोटों को चलन से बाहर कर 500 और 2,000 रुपये के नए नोटों को शुरू किया था।.


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