नई दिल्ली | पिछले कुछ महीनो में देश के दो चेहरे दिखाई दिए है. एक वो जो चेहरा जो भीड़ बनकर किसी शख्स को पीट पीटकर मौत के घाट उतार देता है और दूसरा वो जो किसी निर्दोष को बर्बरता का शिकार होते देखता रहता है. इनमे से कौन सा सही है, कौन सा गलत, या दोनों सही है या दोनों गलत, यह तय करना ज्यादा मुश्किल काम नही है. फिर भी इन दोनों ही चेहरों में से एक चेहरा हमारा है.

यह एक बहुत बड़ा सवाल है की जो भीड़ गौहत्या पर इतनी उग्र हो जाती है की केवल शक के आधार पर एक शख्स को मौत के घाट उतार देती है, वही भीड़ किसी शख्स की आँखों के सामने जाती जान को देखकर भी चुप रहती है. हाल फ़िलहाल में ऐसी बहुत सारी घटनाये हुए है जहाँ एक लड़की को सरेआम चाकुओ से गोदकर मार दिया जाता है और भीड़ चुप चाप खड़े तमाशा देखती रहती है.

जान लेने वाली भीड़ को अगर बर्बर कहा जाएगा तो इस भीड़ को क्या कहेंगे जो चुप रहकर सारा तमाशा देख रही है. यह भीड़ भी उतनी ही बर्बर है जितनी जान लेने वाली भीड़. क्योकि दोनों तरह की भीड़ किसी की जान ले रही है. चाहे हिंसक होकर ले या फिर चुप रहकर. एक ऐसी ही घटना की एक विडियो आजकल सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है जिसमे एक सिख को कुछ लोग बड़ी बर्बरता से पीट रहे है.

सरदार को पीटा जा रहा है और भीड़ तमाशबीन बने खडी रहती है. कमलजीत सिंह सुदान के फेसबुक अकाउंट से पोस्ट की गयी इस विडियो में देखा जा सकता है की कुछ लोग एक सरदार को बड़ी बेरहमी से पीट रहे है. उसके ऊपर इंट से भी हमला होता है, उसका सर फूट जाता है, उसकी पगड़ी खुल जाती है. लेकिन कोई मदद को सामने नही आता. दावा किया गया है की कुछ लोगो ने छेड़छाड़ का विरोध करने पर सरदार की बेरहमी से पिटाई की.

देखे विडियो ( कोहराम न्यूज़ इस विडियो की किसी भी तरह की सत्यता की पुष्टि नही करता)


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