नई दिल्ली। इशरत जहां मामले में गुजरात उच्च न्यायालय में दो हलफनामे दाखिल करने वाले गृह मंत्रालय के पूर्व अधिकारी आर वी एस मणि ने दावा किया था कि हत्याओं पर जांच कर रही एसआईटी के एक सदस्य ने उन्हें बताया था कि 26-11 के मुंबई आतंकवादी हमलों और संसद पर हमले सत्तारूढ़ सरकार की साजिश थे। 2009 में गृह मंत्रालय में अवर सचिव के तौर पर हलफनामे दाखिल करने वाले मणि ने 21 जून, 2013 को तत्कालीन केंद्रीय शहरी विकास सचिव सुधीर कृष्णा को अदालत द्वारा नियुक्त एसआईटी के सामने अपनी गवाही के बारे में बताया था, चूंकि उस समय वह उसी मंत्रालय में पदस्थ थे।

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SIT अधिकारी ने बताया था कि संसद पर हमला, 26/11 की साजिश सरकार की थी: मणि

कृष्णा के सामने अपने बयान में मणि ने कहा था कि गुजरात के गांधीनगर में बयान दर्ज करने के दौरान एसआईटी के आईजी सतीश चंद्र वर्मा ने उनसे कई सवाल पूछे थे जो उनसे संबंधित नहीं थे या गृह मंत्रालय में उनके कार्यकाल के दौरान वे प्रश्न आधिकारिक रूप से उनके कार्यक्षेत्र के नहीं थे।

मणि ने कृष्णा को लिखे नोट में कहा था कि वर्मा ने बताना शुरू किया कि किस तरह भारतीय संसद पर 13 दिसंबर 2001 को और मुंबई में 26 नवंबर 2008 को हुए हमलों की साजिश सत्तारूढ़ सरकार ने रची थी। उन्होंने कहा कि वर्मा ने कहा कि इनकी वजह से आतंकवाद निरोधक कानून मजबूत हुए। उन्होंने बताया कि 13 दिसंबर 2001 के बाद पोटा बना और 26 नवंबर 2008 के बाद यूएपीए में संशोधन किया गया।

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मणि ने लिखा कि मैंने वर्मा को बताया कि उन्हें अपनी राय रखने का हक है लेकिन इस तरह के विचार को आमतौर पर सुरक्षा तंत्र में आईएसआई की राय माना जाता है। मणि का दावा था कि वर्मा ने उन्हें कुछ कागजों पर यह जानते हुए भी हस्ताक्षर करने पर मजबूर किया कि यह मौजूदा समय में मेरे वरिष्ठों को गलत तरह से फंसाने के समान होगा।

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उन्होंने कहा कि मैंने किसी भी बयान पर दस्तखत करने से इनकार कर दिया।  मणि का कहना था कि उक्त संदर्भ में मेरा अनुरोध है कि भविष्य में मैं केवल सीवीओ या मंत्रालय के उनके अधिकृत प्रतिनिधियों की मौजूदगी में ही सीबीआई को बयान दर्ज कराउंगा जबकि विषयवस्तु को गृह मंत्रालय ने भलीभांति परखा हो।

हालांकि वर्मा ने अपने खिलाफ आरोपों को खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि मामले में बात कर रहे कई अधिकारी सेवानिवृत्त हो गए हैं जिसमें मणि और पूर्व गृह सचिव जी के पिल्लई शामिल हैं। (ibnlive)


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