यूपीए शासन के दौरान पेट्रोल-डीजल की कीमतों में मामूली वृद्धि पर भारत बंद करने वाली बीजेपी आज देश की जनता की गाढ़ी कमाई लुटने में लगी हुई है.

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तीन साल पहले के मुकाबले आधी चल रही है. इसके विपरीत मोदी सरकार जनता को फायदा देने के बजाय रोजाना तेल की कीमतों में बढ़ोतरी कर रही है. मुंबई में पेट्रोल की कीमत 80 रुपए और दिल्ली में 70.38 रुपए प्रति लीटर तक हो गई हैं.

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दरअसल, कीमतों में कमी लाने का वादा कर 16 जून से सरकार ने डायनमिक फ्यूल प्राइस का फॉर्मूला अपनाया था, जिसमें डेली बेसिस पर पेट्रोल और डीजल की कीमते रिव्यू हो रही हैं.  ऐसे में 1 जुलाई के बाद दिल्ली में पेट्रोल की कीमतें 7.29 रुपए प्रति लीटर तक बढ़ चुकी हैं. वहीँ डीजल की कीमतों में  5.36 रुपए प्रति लीटर तक की बढ़ोत्तरी हुई है. ध्यान रहे नरेंद्र मोदी ने साल 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को बड़ा मुद्दा बनाया था.

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उन्होंने 1 फरवरी को एक रैली में अपने भाषण में कहा था, ‘क्या डीजल पेट्रोल के दाम कम हुए हैं कि नहीं…क्या आपकी जेब में पैसा बचने लगा है की नहीं…अब विरोध कहते हैं कि मोदी नसीबवाला है…तो अगर मोदी का नसीब जनता के काम आता है तो इससे बढ़िया नसीब की क्या बात हो सकती है…आपको नसीब वाला चाहिए या बदनसीब?

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जिस दिन पीएम मोदी ने यह भाषण दिया था उस समय दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 58.91 रुपये और डीजल 48.26 रुपए प्रति लीटर थी.  मोदी सरकार के आने के बाद से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम 53 फीसदी की कमी आई है, लेकिन पेट्रोल डीजल के दामों में कोई ख़ास कमी देखने को नहीं मिली.


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