केंद्र की नीतियों से आहत राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े भारतीय मज़दूर संघ यानी बीएमएस अब मोदी सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरकर विरोध करने का फैसला किया है.

बीएमएस ने मोदी सरकार की आर्थिक नीतियां को ग़रीब विरोधी, श्रमिक विरोधी और कर्मचारी विरोधी करार दिया. संगठन सरकारी कंपनियों में विनिवेश और रोज़गार देने वाले उद्योगों में विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के मोदी सरकार के फैसलों से भी नाराज़ हैं.

इसी के साथ बीएमएस मोदी सरकार द्वारा किये गए वादों को पूरा नहीं होने से भी दुखी है. ध्यान रहे अगस्त 2016 में वित्त मंत्री ने बीएमएस के नेताओं से वादा किया था कि मज़दूरों के लिए एक प्रभावी सामाजिक सुरक्षा से लेकर न्यूनतम मज़दूरी तय की जाएगी लेकिन उस वादे को सही तरीके से पूरा नहीं किया.

बीएमएस ने बताया कि श्रमिक महारैली  के तहत पांच लाख बीएमएस कार्यकर्ता दिल्ली की सड़कों पर उतर कर मोदी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे.

पिछले गुरुवार को ही दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के हज़ारों कार्यकर्ता मोदी सरकार की आर्थिक और श्रम सुधार नीतियों का विरोध कर चुके हैं.


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