समलैंगिक संबंधों को लेकर आरएसएस की तरफ से चौंकाने वाला बयान आया है। संघ ने कहा कि समलैंगिकता अपराध नहीं है। किसी का भी सेक्स चुनाव तबतक अपराध नहीं है, जबतक वह दूसरों के जीवन पर असर नहीं डालता। संघ के इस बयान के बाद होमोसेक्शुअलिटी को गैरआपराधिक कराने की बहस और तेज हो सकती है।

एक कार्यक्रम में बोलते हुए संघ के संयुक्त महासचिव दत्तात्रेय होसाबले ने कहा, ‘समलैंगिकता पर आरएसएस की राय क्यों होनी चाहिए?  जबतक दूसरों के जीवन पर असर नहीं डालती तबतक यह अपराध नहीं है।

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दत्तात्रेय ने कहा कि सेक्स चुनाव किसी का भी निजी मसला है। संघ की तरफ से यह बयान आने के बाद ऐसी उम्मीद है कि सरकार आईपीसी की धारा 377 को रद्द करने की कोशिश करे। इसी धारा के तहत समलैंगिकता को अपराध माना जाता है।

वहीं बीजेपी में कुछ ही नेता ऐसे हैं, जो समलैंगिक रिश्तों को अपराध की श्रेणी से बाहर रखने की वकालत करते हैं। हाल में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि जब लाखों लोग इसमें (गे सेक्स) शामिल हैं, तो आप उन्हें अनदेखा नहीं कर सकते। पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट भी समलैंगिक रिश्तों को अपराध बताने वाली आईपीसी की धारा 377 के खिलाफ दाखिल सभी आठ क्यूरिटिव पिटिशन्स पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया था।

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सुप्रीम कोर्ट ने पांच जजों की बेंच को यह मामला सौंप दिया है। आईपीसी की धारा 377 समलैंगिकता को अपराध मानती है। इसके लिए अधिकतम 10 साल तक जेल हो सकती है। दिल्ली हाई कोर्ट ने समलैंगिक रिश्तों को क्राइम की श्रेणी से यह कहते हुए हटाया था कि यह असंवैधानिक है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 11 दिसंबर 2013 को इस फैसले को पलट दिया।

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उस समय सुप्रीम कोर्ट ने सेम सेक्स कॉन्सेंशुअल सेक्स रिलेशनशिप को डिक्रिमिनलाइज करने से मना कर दिया था। (liveindia)


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