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नोटबंदी को लेकर मोदी सरकार को अब विपक्ष के साथ ही अपनों की आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा हैं. शिवसेना पहले ही इस मामलें में मोदी सरकार के खिलाफ खड़ी हो चुकी हैं वहीँ अब पूर्व संघ विचारक और बीजेपी नेता रह चुके केएन गोविंदाचार्य ने भी मोदी सरकार के खिलाफ मौर्चा खोलते हुए केंद्र को नोटिस भेजा हैं. गोविंदाचार्य ने केंद्र को भेजे नोटिस में नोटबंदी की वजह से लाइन में लगने से जान गंवाने वाले लोगों के लिए केंद्र से मुआवजे की मांग की है. ये नोटिस वित्त सचिव शक्तिकांत दास के नाम भेजा गया है.

गोविंदाचार्य ने सरकार को लीगल नोटिस भेजकर पूछा है कि नोटबंदी की इस आपाधापी में अभी तक 40 लोगों की मौत हुई है, क्या उनके लिए सरकार की जवाबदेही नहीं है? क्या सरकार द्वारा नोटबंदी के फैसले से आहत, मृत या पीड़ित लोगों को मुआवजा नहीं मिलना चाहिए? इतना ही नहीं उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक की धारा का हवाला देते हुए कहा है कि सरकार द्वारा नोटों के उपयोग की छूट के लिए आरबीआई एक्ट 1934 की धारा 26(2) के तहत 8 नवंबर को जो नोटिफिकेशन जारी की गई उसके लिए रिजर्व बैंक के सेंट्रल बोर्ड की अनुशंसा जरूरी है जिसका पालन की नहीं हुआ.

गोविंदाचार्य ने कहा, “सरकार द्वारा बड़े नोटों की बंदी का हड़बड़ी में लिया गये फैसले से पूरी अर्थव्यवस्था ठप्प सी हो गई है. इस आपाधापी में अभी तक 40 लोगों की मौत की खबर है, क्या उनके लिए सरकार की जवाबदेही नहीं?  क्या सरकार द्वारा नोटबंदी के फैसले से आहत, मृत या पीड़ित लोगों को मुआवजा नहीं मिलना चाहिए? सरकार द्वारा बड़े नोटों की बंदी के फैसले के बाद विभिन्न वर्गों को छूट देने का फैसले के लिए कानून में प्रावधान ही नहीं है.

सरकार द्वारा नोटों के उपयोग की छूट के लिए आरबीआई एक्ट 1934 की धारा 26(2) के तहत 8 नवंबर को जो नोटिफिकेशन जारी की गई उसके लिए रिजर्व बैंक के सेंट्रल बोर्ड की अनुशंसा जरूरी है जिसका पालन ही नहीं हुआ. इतने बड़े फैसले में सरकार की विफलताओं से पूरा देश त्रस्त है.


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