नई दिल्ली | एक देश एक कर के स्लोगन के साथ संसद में पास किये गए सबसे बड़े कर सुधार ‘जीएसटी’ लागू होने में अब केवल चार दिन रह गए है. 1 जुलाई से जीएसटी को पुरे देश में लागु कर दिया जाएगा. लेकिन अभी भी काफी लोग ऐसे है जो जीएसटी की प्रस्तावित कर दरो से सहमत नही है. इनमे सबसे ताजातरीन नाम आरएसएस का जुड़ गया है. जिन्होंने जीएसटी को लघु उधोगो के लिए बड़ा खतरा बताया है.

उनका कहना है की जीएसटी की प्रस्तावित दरो से लघु उधोग चौपट हो जायेंगे, जिसकी वजह से ग्रामीण इलाको में बड़ी संख्या में बेरोजगारी बढ़ जाएगी. इसके अलावा लघु उधोगो के बंद से होने से देश का उत्पादन घटेगा जिससे चीन से आयात बढेगा. यह पहला मौका है जब आरएसएस ने मोदी सरकार के किसी फैसले का इस तरह खुलकर विरोध किया है. अगर यह विरोध बड़े पैमाने पर किया गया तो निश्चित तौर पर इससे मोदी सरकार की मुश्किलें बढेंगी.

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दरअसल आरएसएस की आर्थिक शाखा स्वदेशी जागरण मंच ने जीएसटी का खुलकर विरोध करते हुए इस पर सवाल खड़े किये है. मंच के संयोजक अश्विनी महाजन ने कहा की जीएसटी के क्रियानावन की तारीख नजदीक आने से छोटे उधमियो और व्यापारियों की धड़कने बढ़नी शुरू हो गयी है. इसका कारण यह है की अब तक छोटे उधोगो को डेढ़ करोड़ रुपये के उत्पादन पर उत्पाद शुल्क से छूट दी जाती थी लेकिन जीएसटी में इसको खत्म कर दिया गया.

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महाजन ने बताया की जीएसटी में इसको डेढ़ करोड़ से घटाकर 20 लाख रूपए कर दिया गया. अब कोई भी इकाई जिसका कारोबार 20 लाख रूपए से ज्यादा है उसको उसी राज्य में जीएसटी के लिए रजिस्ट्रेशन कराना होगा. इसलिए इस नई कर प्रणाली से जहाँ लघु और कुटीर उधोग बड़े स्तर पर प्रभावित होंगे वही ग्रामीणों में बेरोजगार बढेगा क्योकि ये उधोग पूरी तरह से श्रम आधारित है. जबकि इनमे से ज्यादातर उधोगो को ऊँचे कर दरो के दायरे में रखा गया है.

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