भारतीय रिजर्व बैंक की और से नोटबंदी के आकडे जारी होने के बाद विपक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कान पकड कर नोटबंदी के लिए देश से माफ़ी मांगने की बात कही है. लेकिन अब आरएसएस भी नोटबंदी के खिलाफ आवाज उठनी शुरू हो गई है.

आरएसएस से जुड़े भारतीय मज़दूर संघ और भारतीय किसान संघ ने नोटबंदी पर सवाल उठाते हुए इस फैसले को गलत माना है. संघ के अध्यक्ष साजी नारायणन ने कहा कि देश की 25% आर्थिक गतिविधि पर नोटबंदी का बुरा असर पड़ा है. उन्होंने कहा कि सबसे ज़्यादा असर असंगठित सेक्टर पर इसका असर हुआ है.

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उन्होंने कहा कि बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन, छोटे उद्योग और कृषि क्षेत्र में दिहाड़ी मज़दूरों पर नोटबंदी का सबसे बुरा असर पड़ा है. उन्होंने कहा कि अब सरकार नोटबंदी से प्रभावित लाखों मज़दूरों के लिए बजट में विशेष प्रावधान का एलान करे. उन्होंने कहा कि मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी बढा़ई जाय और उनके लिए सामाजिक सुरक्षा की नीति लागू की जाए.

वहीँ भारतीय किसान संघ के सचिव मोहिनी मोहन मिश्रा ने कहा कि नोटबंदी का सबसे बुरा असर कृषि क्षेत्र के मजदूरों पर पड़ा है. उन्होंने कहा कि किसानों पर भी इसका व्यापक असर पड़ा है.

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उन्होंने सरकार से मांग है कि सरकार बढ़ी हुई कमाई से एक स्पेशल फंड बनाए और किसानों को जीरो फीसदी पर लोन मुहैया कराया जाए.उन्होंने कहा कि सरकार को कृषि क्षेत्र के लिए बजट भी बढ़ाना चाहिए है.


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