नई दिल्ली। हैदराबाद यूनिवर्सिटी में 17 जनवरी 2016 को फांसी लगाने वाले दलित स्कॉलर रोहित वेमुला की मां राधिका वेमुला ने हिंदू धर्म छोड़ने का फैसला किया है। उन्होंने कहा है कि हिंदू धर्म में जन्मगत आधार पर भेदभाव की व्यवस्था है। वह इससे मुक्ति चाहती हैं। 14 अप्रैल को वह बौद्ध धर्म स्वीकार कर लेंगी।

इंडिया टुडे मैग्ज़ीन के पूर्व प्रबंध संपादक दिलीप मंडल समेत कई लोगों ने राधिका वेमुला को बधाई दी है। दिलीप मंडल ने अपनी फेसबुक वॉल पर लिखा है, ‘ताजा खबर यह है कि मां राधिका वेमुला ने हिंदू धर्म से छुटकारा पाने का फैसला किया है। वे 14 अप्रैल को बौद्ध धर्म स्वीकार करेंगी। जन्मगत भेदभाव से मुक्ति का राधिका वेमुला का मार्ग मंगलमय हो. साधु, साधु।’
रोहित वेमुला की ख़ुदकुशी के बाद से देशभर में उन्हें इंसाफ दिलाने की मुहिम चल रही है। उनकी मां राधिका वेमुला भी इन आंदोलनों में हिस्सा ले रही हैं। वो दिल्ली में इंडिया गेट से लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर चुकी हैं। दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने भी उन्हें न्याय का भरोसा दिलाया है।
माना जाता है कि रोहित वेमुला ने जातिगत उत्पीड़न के चलते ख़ुदकुशी की थी लेकिन बाद में उनकी जाति पर विवाद हो गया था। दावा किया जा रहा था कि वह दलित नहीं ओबीसी हैं। इस विवाद पर विराम लगाने के लिए उनकी मां राधिका सामने आईं। उन्होंने कहा, रोहित के पिता वेदारा समुदाय के थे जिसे तेलंगाना में पिछड़ी जाति का दर्जा हासिल है लेकिन अपने आख़िरी बच्चे को जन्म देने के बाद मैं निजी कारणों से अपने पति से अलग हो गई। तीनों बच्चों को मैंने अपने साथ रखा। उसके बाद मैं अनुसूचित जाति (माला) इलाक़े में रहने लगी क्योंकि मैं जन्म से ही माला समुदाय की हूँ।

रोहित की मां ने हैदराबाद विश्वविद्याल से आठ लाख रुपए बतौर मुआवज़ा लेने से भी इनकार कर दिया था। उन्होंने मुआवज़े की बजाय न्याय को तरजीह दी। रोहित वेमुला के लिए अभी भी आंदोलन जारी है। हैदराबाद यूनिवर्सिटी में छात्र और प्रशासन लगभग आमने-सामने हैं। उनकी मांगों में वाइस चांसलर अप्पा राव को हटाया जाना भी शामिल है। (liveindiahindi.com)

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