अंतरर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त इस कैंपस पर दुनिया की नजरें टिकी है। एक हफ्ते से बुद्धिजीवियों का गढ़ माने जाने वाला यह जगह सबसे बड़ी खबर का केंद्र बन गया है। छोटी से चिंगारी दावानल बनकर दहक रही है और राजनीतिक दलों के नेता इस मौके पर सियासी रोटियां सेंक रहे हैं। इस मुद्दे का तीखी राजनीतिक विवाद में आने के साथ ही इस बात की आशंका प्रबल हो गई है कि इस मसले की गूंज संसद के बजट सत्र में भी सुनाई देगी।

jnu

इस मुद्दे के बहाने एक बार फिर से संसद का कामकाज ठप करने की कोशिश भी की जा सकती है। मॉनसून और शीतकालीन सत्र में जो नजारे संसद भवन में दिखे थे उसके फिर नजर आने की पूरी संभावना है। ऐसे में सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी (भा ज पा) ने पहले से इसकी तैयारी शुरु कर दी है। जेएनयू में देश विरोधी नारों पर गरमाई राजनीति में आक्रामक रूख अपनाने वाली भा ज पा अब इस मामले पर देश की जनता की नब्ज टटोलने के लिए देशव्यापी ‘जन स्वाभिमान अभियान’ का सहारा ले रही है। भा ज पा नेता रविशंकर प्रसाद कहते हैं कि लोगों को जे एन यू से आने वाली वैकल्पिक आवाज को सुनना चाहिए।

और पढ़े -   दिल्ली मेट्रो स्टेशन के बाहर पेशाब करने से रोका तो पीट पीट कर मार डाला

“जेएनयू परिसर में एक वैकल्पिक आवाज भी है जो प्रभावी है, सशक्त है, रचनात्मक है, देश उस आवाज को भी सुनना चाहता है।”

जानकार कहते हैं कि इस मुद्दे का असर सिर्फ संसद सत्र पर ही नहीं, असम, पश्चिम बंगाल और केरल विधानसभा चुनावों पर भी पड़ेगा। देश विरोधी नारे लगाने वालों के समर्थन से कांग्रेस और वामपंथी दलों के खिलाफ माहौल तैयार होगा। राजनीति के जानकार भी इस बात से इंकार नहीं करते कि पश्चिम बंगाल, केरल, असम में इसका फायदा भा ज पा को मिल सकता है। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि इस मामले की गूंज भारत के समाज और सियासत में लंबे समय तक सुनाई पड़ेगी।

और पढ़े -   अभिजीत ने ट्वीटर अकाउंट बंद होने पर उतारी खीज कहा, ट्वीटर है मोदी और हिन्दू विरोधी

किसी को इस मामले से फायदा होगा तो किसी को नुकसान। लेकिन जे एन यू की छवि को इस पूरे विवाद में जितना नुकसान पहुंचा है ऐसा शायद ही कभी हुआ हो। ऐसे में यह आंदोलन का नहीं मंथन का समय है सबके लिए। वहां के छात्रों के लिए, शिक्षकों के लिए तो उन राजनीतिक जमात के लिए भी जो यहां पहुंचकर इस मुद्दे को सुलझाने के बजाय उलझाने में लगे हैं। योगगुरु स्वामी रामदेव इस पूरे मामले पर कहते हैं,

और पढ़े -   अख़लाक़ की हत्या में आरोपी ने खुद अपनी जान देने की मांगी इजाजत

“जेएनयू के अंदर जिन्होंने देशद्रोह नारे लगाए हैं उनका साथ देने वाले भी बराबर के भागीदार हैं आध्यात्मिक और कानूनन दोनों रूप से। अपराध करने वाला और समर्थन करने वाला दोनों बराबर के हकदार होते हैं। जेएनयू में देशद्रोह करने वालों का जिसने भी समर्थन किया है वो सब एक ही दायरे में हैं। ऐसे में देश के लोगों को सोचना चाहिए कि आखिर जिन लोगों की विचारधारा राष्ट्रविरोधी है वैसे कैसे भारत का भला कर सकते हैं”


Urdu Matrimony - मुस्लिम परिवार में विवाह के लिए अच्छे खानदानी रिश्तें ढूंढे - फ्री रजिस्टर करें



Facebook Comment
loading...
कोहराम न्यूज़ की एंड्राइड ऐप इनस्टॉल करें

SHARE