नेपाल के रुख के कारण भारत की भावनाओं को ठेस पहुंची है। चिंता की बात यह भी कि इस दौरान नेपाल में भारत विरोधी भावनाओं को भी काफी बल मिला है। ऐसे में भारत की यात्रा पर आने से पहले साकारात्मक संदेश देते हुए नेपाल के प्रधानमंत्री ने कहा है कि वो आपसी रिश्तों में आई गलतफहमी को दूर करने आ रहे हैं। 19 फरवरी को शुरु हो रही  भारत यात्रा के दौरान क्या प्रधानमंत्री ओली आपसी रिश्तों में आई उलझनों को सुलझा पाएंगे? नेपाल की राजनीति और वहां के हालत पर पैनी नजर रखने वाले ऱक्षा विशेषज्ञ रिटायर्ड मेजर जनरल अशोक मेहता कहते हैं,

“भारत यही चाहेगा कि नेपाल के संविधान में जो भी संशोधन होने हैं खासतौर पर डिमार्केशन का उसके ऊपर आगे कार्रवाई हो। जहां तक रिश्तों की बात है तो उसे बेहतर करना लाजिमी है। पिछले 5 महीने के दौरान वहां जो भारत विरोधी भावनाएं बढ़ी हैं उसको दूर करना  चाहिए। नेपाल की अर्थव्यवस्था को पिछले 5 महीने में जो धक्का लगा है उससे निपटने के लिए उन्हें भारत का सहयोग चाहिए। पुनर्निर्माण के लिए भी नेपाल को भारत का साथ चाहिए। वहीं भारत की चिंता इस बात को लेकर है कि वहां भारत विरोधी भावनाएं बढ़ी हैं।”

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report over Nepal and india relationship

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के न्यौते पर ओली की बहुप्रत्याशित यात्रा तब हो रही है जब कुछ दिन पहले मधेसियों ने अपना जबरदस्त विरोध प्रदर्शन और नाकेबंदी खत्म कर दी है। ऐसे में नेपाल के प्रधानमंत्री की भारत यात्रा पर मधेसियों की भी निगाहें टिकी हैं। ऱक्षा विशेषज्ञ रिटायर्ड मेजर जनरल अशोक मेहता आगे कहते हैं,

“भारत यात्रा से पहले उन्होंने एलान कर दिया है कि तीन महीने में डिमार्केशन के लिए एक आयोग बैठाएंगे लेकिन ये कब-तक होगा यह देखना अहम होगा। मुझे लगता है फिलहाल संविधान में जो दो संशोधन किए गए हैं उसको ध्यान में रखते हुए आगे का इंतजार करना चाहिए।”

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इस बीच मधेसी नेताओं ने साफतौर पर कहा है कि प्रधानमंत्री केपी ओली की यात्रा की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वो आंदोलनकारियों की मांगों पर किस तरह का रुख अपनाते हैं। मधेसी समुदाय के लोगों ने कहा है कि उनकी भारत यात्रा तभी सफल मानी जाएगी जब प्रधानमंत्री उनकी चिंताओं के समाधान के लिए प्रतिबद्धता जताएंगे। जानकार कहते हैं कि फिलहाल मधेसी समुदाय के लोगों ने अपने विरोध का तरीका बदला है। ऐसे में अगर उनकी चिंताओं का समाधान नहीं किया गया तो एक बार  फिर  से उनका रुख कड़ा हो सकता है। ऐसे में केपी ओली को इस मुद्दे पर सकारात्मक कदम उठाना चाहिए। ऐसा इसलिए भी जरूरी है क्योंकि उनकी भारत यात्रा पर इस समुदाय के लोगों की निगाहें टिकी हैं। खास बात ये भी है कि उन्होंने प्रधानमंत्री ओली की इस यात्रा से पहले देश में शांति स्थापित करके आगे की राह प्रशस्त करने का मौका दिया है।

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