राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (एनसीएम) में खाली पदों को लेकर आलोचना का सामना कर रही मोदी सरकार ने आखिर राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग का पुनर्गठन कर दिया. आयोग में मार्च से ही सभी सदस्यों के पद खाली पड़े थे. आयोग पर अल्पसंख्यक समुदायों के हितों की रक्षा की जिम्मेदारी होती है.

प्राप्त जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश के समाजसेवी गयरूल हसन आयोग के अध्यक्ष नियुक्त किया गया. वहीँ केरल के भाजपा नेता जॉर्ज कुरियन, महाराष्ट्र की पूर्व मंत्री सुलेखा कुंभरे, गुजरात से जैन प्रतिनिधि सुनील सिंघी और उद्वदा अर्थानन अंजुमन वडा दस्तूरजी खुर्शीद आयोग के अन्य नवनियुक्त सदस्यों में शामिल हैं. हालांकि आयोग के दो और सदस्यों की नियुक्ति की प्रक्रिया अभी चल रही है.

आयोग में अब तक परंपरा यह थी कि किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश या नौकरशाह को आयोग का अध्यक्ष या सदस्य बनाया जाता था. ऐसा शायद पहली बार हुआ है कि सारे सदस्य समाजसेवी हैं. इस बारें में  नकवी ने कहा, ये काफी योग्य लोग हैं. हमें उम्मीद है कि वे अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दों के साथ न्याय करेंगे.

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992 के तहत एनसीएम की स्थापना हुई थी, जिसका काम देश के पांच धार्मिक समुदायों (मुस्लिमाें, ईसाइयों, सिखों, बौद्धों और पारसियों) की शिकायतों पर विचार करना है. एनसीएम में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष सहित सात सदस्य हैं.


Urdu Matrimony - मुस्लिम परिवार में विवाह के लिए अच्छे खानदानी रिश्तें ढूंढे - फ्री रजिस्टर करें



Loading...
कोहराम न्यूज़ की एंड्राइड ऐप इनस्टॉल करें

अभी पढ़ी जा रही ख़बरें

SHARE