पूर्व आईपीएस और कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व उपकुलपति किशोर कुणाल ने अपनी नई किताब ‘अयोध्या रिविज़िटेड’ में कहा कि 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में जो मस्जिद गिराई गई, वह बाबरी मस्जिद नहीं थी। और अयोध्या में जो राम मंदिर था, जिसे बाबर के काल में तोड़े जाने का दावा किया जाता हैं को औरंगजेब के शासनकाल में तोड़ा गया।

कामेश्वर सिंह के अनुसार इसे साबित करने के लिए जरूरी साक्ष्य उनके पास हैं। इसे औरंगजेब के सौतेला भाई फिदायी खान ने उसके शासनकाल में तुड़वाया था। उन्होंने दावा किया हैं कि 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में जो मस्जिद गिराई गई, वह बाबरी मस्जिद नहीं थी। न तो बाबर ने उसे बनवाया और न ही मंदिर तुड़वाया।

उनके अनुसार बाबर उदारवादी शासक था। उसके साथ अन्याय हुआ है। उस पर मंदिर तोड़ने और मस्जिद बनवाने का गलत आरोप लगाया गया है। बाबरी मस्जिद बाबर ने नहीं बनवाई थी। बाबर कभी अयोध्या नहीं गया। जो शिलालेख मस्जिद पर लगे थे वे फर्जी हैं।


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