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आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन ने गुरुवार को कहा कि RBI गवर्नर का कार्यकाल कम होता हैं. उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक के प्रमुख का कार्यकाल लंबा होना चाहिए. वैश्विक स्तर पर जो चलन है उसे भारत में भी अपनाया जाना चाहिए.

राजन ने संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति के सदस्य द्वारा आरबीआई गवर्नर के कार्यकाल के बारे में पूछे जाने पर कहा कि तीन साल का कार्यकाल छोटा है. उनसे पूछा गया कि क्या यह पांच साल का होना चाहिए ? तो राजन ने अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मिसाल देते हुए कहा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व में निदेशक मंडल के सदस्य के अलावा चेयरमैन और डिप्टी चेयरमैन का कार्यकाल चार साल का होता है और उन्हें दोबारा नियुक्त किया जा सकता है.

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राजन ने समिति को एनपीए की समस्याएं निपटने के लिए उठाए गए विभिन्न कदमों के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि बैंकों का सकल एनपीए 2016-17 में बढ़कर 9.3 प्रतिशत हो जाएगा जो मार्च 2016 में 7.6 प्रतिशत था. उन्होंने सांसदों से कहा कि निजी बैंक ऋण देने के मामले में ज्यादा सक्रिय हैं, लेकिन सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ऐसी स्थिति में भी ऋण देने के प्रति उदासीन रहते हैं जबकि कोष की कोई कमी नहीं होती.

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आरबीआई गवर्नर कांग्रेस से वरिष्ठ नेता एम. वीरप्पा मोइली की अध्यक्षता वाली समित के समक्ष अर्थव्यवस्था की स्थिति, सुधार और आरबीआई के पुनर्गठन व भारत में बैंकिंग क्षेत्र की चुनौतियों तथा आगे की राह के बारे में अपनी बात रख रहे थे.


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