नई दिल्ली | करीब 8 महीने पहले देश में 500 और 1000 के करीब 15 लाख करोड़ रूपए चलन से बाहर कर दिए गए. खुद प्रधानमंत्री मोदी ने नोट बंदी की घोषणा करते हुए कहा था की सरकार यह कदम भ्रष्टाचार, आतंकवाद और कालेधन पर बड़ी चोट होगा. लेकिन ऐसा लगता है की बाकी वादों की तरह यह घोषणा भी मात्र एक जुमला ही निकली. नोट बंदी के पीछे जो कारण बताये गए उनमे सरकार एक में भी सफल नही हो पाई.

दरअसल बुधवार को संसद की स्थाई समिति के सामने पेश हुए आरबीआई के गवर्नर उर्जित पटेल, यह बताने में विफल रहे की नोट बंदी के बाद बैंकों में कितने पुराने नोट जमा हुए. उन्होंने वही पुराने कारण गिनाते हुए कहा की अभी तक पुराने 500 और 1000 के नोटों की गिनती पूरी नही हुई है. इसलिए कोई भी आंकड़ा अभी नही दिया जा सकता. उर्जित पटेल के इस जवाब पर दिग्विजय सिंह तंज कसे बिना नही रह सके.

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उहोने तुरतं उर्जित पटेल से ऐसा सवाल पूछ लिए की वो झेंप गए. दिग्विजय ने उनसे पुछा की हम आपके कारणों को मान लेते हैं, लेकिन ये बताइये कि क्या मई 2019 तक आप ये बता पायेंगे कि कितनी करेंसी बैंकों के पास वापस आई? दिग्विजय के इस सवाल ने उर्जित पटेल को असहज कर दिया. वो इस सवाल का कोई जवाब नही दे सके. हालाँकि उन्होंने कहा की हम नोट गिनने के लिए और मशीन खरीदने पर विचार कर रहे है.

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उर्जित पटेल के पास यह आंकड़ा भी मौजूद नही था की नेपाल में कितने पुराने नोट जमा हुए. इसके अलावा कहा की सहकारी बैंकों में जमा पुराने नोटों का कोई आंकड़ा अभी नही आया है. इस दौरान संसदीय समिति ने उर्जित पटेल से एनपीए को लेकर भी सवाल किये. समिति ने पटेल से डिफाल्टर के नाम पूछे लेकिन उन्होंने गोपनीयता का हवाला देकर उनके नाम बताने से इंकार कर दिया. बताते चले की उर्जित पटेल नोट बंदी के बाद दूसरी बार संसदीय समिति के सामने पेश हुए है.

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