नई दिल्ली | एनडीटीवी के जाने माने एंकर रविश कुमार ने राजकोट में हुए प्रधानमंत्री मोदी के रोड शो की आलोचना करते हुए एक लिखा है. इस लेख में उन्होंने मोदी जी से पुछा है की सादगी की बात करने वाले एक प्रधानमंत्री को क्या इतने महंगे रोड शो में हिस्सा लेना शोभा देता है? इसके अलावा रविश ने यह भी सवाल किया की क्या गाँधी जी इतने महंगे रोड शो और उसके लिए होने वाली शहर की सजावट को गुजरात में मंजूर करते?

दरअसल गुरुवार को प्रधानमंत्री मोदी ने राजकोट में एक 9 किलोमीटर लम्बा रोड शो किया .इस दौरान पुरे शहर को सजाया गया, जिन गोलचक्कर से मोदी का काफिला गुजरने वाला था उन सबको एक थीम के आधार पर सजाया गया. लेजर के जरिये मोदी सरकार की कामयाबी की 3डी रचना भी की गयी. यही नही जगह जगह सेल्फी पॉइंट भी बनाये गए जहाँ मोदी के कटआउट रखे गए थे. जिससे की लोग मोदी के कटआउट के साथ सेल्फी ले सके.

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रविश कुमार ने इसी भव्यता की आलोचना की है. उनका कहना है की एक 9 किलोमीटर रोड शो के लिए 70 करोड़ रूपए खर्च कर देना एक साधारण देश के लिए कितना जायज है. रविश ने आगे लिखा की रोड शो में मोदी जी के चेहरे पर छाई प्रसन्नता चंद घटने पहले महात्मा गाँधी और विनोबा भावे के नाम से अहिंसा की बात करने वाले एक प्रधान सेवक का मजाक उड़ा रही थी.

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रविश ने तंज कसते हुए आगे लिखा की यह कुछ इस तरह था जैसे कोई बच्चा नशाविरोधी बहस में जोरदार भाषण देकर इनाम जीत गया हो और बाद में वो ही बच्चा उस इनाम के पैसे से पब में पार्टी कर रहा है. आज उन्हें इस रोड शो में देखकर दुःख हुआ. वो अभी अभी नीदरलैंड से लौटे है जहाँ उनको एक साइकिल भेंट की गयी. वो लाल बत्ती पर बैन लगाकर इस बात का श्रेय लेना चाहते है की उन्होंने देश से वीआईपी कल्चर खत्म किया. अपने निवास का नाम लोकसेवक मार्ग रखा.

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रविश ने आगे लिखा की जो सादगी उनकी बातो में दिखती है वो कामो में नही दिखती. ऐसा क्या हो गया है राजकोट में कि उनके आगमन पर इतना पैसा लुटाया गया. यह बात शायद ही कभी आप जान पाएंगे की इस आयोजन में कितना पैसा खर्च हुआ क्योकि आदर और ताकत के प्रभाव में कोई सवाल नही करेगा. अब यह मान लेना चाहिए की भारत की राजनीति में सादगी की उम्मीद करना या शाहख़र्ची को लेकर सवाल करने की परंपरा की मृत्यु हो चुकी है?


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