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जयपुर | राजस्थान की वसुंधरा सरकार, हाल ही में एक अध्यादेश को लेकर काफी सुर्खियों में रही. अध्यादेश के अनुसार बिना सरकार की अनुमति के किसी भी मंत्री, अधिकारी, विधायक और जजों के खिलाफ कोई शिकायत न दर्ज की जाएगी और न ही अदालत में उसके खिलाफ सुनवाई होगी. यही नही अदालत भी बिना सरकार की इजाजत के किसी भ्रष्ट अधिकारी या अन्य के खिलाफ एफआईआर का आदेश नही दे पाएंगी.

इस तरह भ्रष्टाचारियो को बचाने के लिए लाये गए इस विधेयक को 23 अक्टूबर को विधानसभा में रखा गया जिस पर काफी हंगामा हुआ. जिसके बाद वसुंधरा सरकार बेकफूट पर आ गयी और विधेयक को सेलेक्ट समिति के पास भेज दिया गया. इसके पीछे केवल विपक्ष ही नही बल्कि मीडिया के विरोध का भी बड़ा हाथ रहा जिसने सरकार को अपने फैसले से पीछे हटें पर मजबूर किया. क्योकि विधेयक के पास होने पर मीडिया पर भी काफी बंदिशे लग जाती.

क्योकि कानून के मुताबिक मंज़ूरी लिए बिना किसी सरकारी अधिकारी के विरुद्ध कुछ भी प्रकाशित करने पर मीडिया को भी अपराधी माना जाएगा, और पत्रकारों को इस अपराध में दो साल तक की कैद की सजा सुनाई जा सकती है. हालाँकि यह बिल सेलेक्ट समिति के पास जा चूका है लेकिन राजस्थान पत्रिका के अनुसार यह अध्यादेश अभी भी राज्य में लागु है. क्योकि सरकार पहले ही इस कानून को अध्यादेश लाकर लागु कर चुकी है.

पत्रिका ने दावा किया की अगर ऐसा नही है तो कोई भी मीडिया समूह किसी भ्रष्ट अफसर का नाम छाप कर देख सकता है. सरकार की इस मनमानी के विरोध में राजस्थान पत्रिका ने बेहद ही सख्त कदम उठाया है. पत्रिका ने फैसला किया है की जब तक यह काला कानून वापिस नही लिया जायेगा तब तक पत्रिका वसुंधरा राजे और सरकार से सम्बंधित कोई भी समाचार कवर नही करेगी. पत्रिका इसका बहिष्कार करेगी. पत्रिका ने विधेयक वापिस लेने के फैसले को जनता की आँखों में धुल झोंकना करार दिया.


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