जयपुर | पिछले कुछ महीनो में गाय, गौरक्षा , बीफ और गौरक्षक देश के मुख्य मुद्दा बनकर उभरे है. हाल ही में बीफ को लेकर केंद्र सरकार के नोटिफिकेशन पर काफी हंगामा हो रहा है. इसके अलावा रोजाना देश के किसी न किसी कौने से गौरक्षको की गुंडागर्दी की खबरे सुनाई दे जाती है. केंद्र और कई राज्यों में सत्ताधारी बीजेपी ,अपने हिन्दुत्वादी एजेंडे को आगे बढाने के लिए गाय पर खूब राजनीति करने की कोशिश कर रहा है.

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हालाँकि विपक्षी दल बार बार मांग कर रही है की गौमांस पर कानून बनाकर प्रतिबंध लगाया जाए और गाय को राष्ट्रिय पशु घोषित किया जाए लेकिन सरकार इन मांगो को अनदेखा कर केवल मुद्दे पर राजनीती करना चाहती है. इसका कारण यह है की देश के उत्तरपूर्व और कुछ दक्षिणी राज्यों में गौमांस पर प्रतिबंध नही है. इसलिए वहां गौमांस पर बैन लगाने से बीजेपी को अपना वोट बैंक छिटकने का डर लगा रहता है.

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लेकिन अब राजस्थान हाई कोर्ट ने इस मामले में पहल करते हुए राज्य सरकार को आदेश दिया है की वो गाय को राष्ट्रिय पशु घोषित करवाए और गोकसी करने वालो के खिलाफ सख्त सजा का प्रावधान कानून में शामिल करवाए. कोर्ट ने सजा के तौर पर आजीवन कारवास की सजा का सुझाव भी दिया. हाई कोर्ट ने हिंगोनिया गौशाला मामले में सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया.

सात साल पुराने मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस महेश चंद शर्मा ने प्रदेश के मुख्य सचिव और महाधिवक्ता को निर्देश दिया की वो गाय को राष्ट्रिय पशु घोषित करवाने के लिए कार्यवाही करे. इसके अलावा कोर्ट ने मामले में हाई कोर्ट के अधिवक्ताओ की एक कमिटी बनाने का भी निर्देश दिया. अपने आखिरी फैसले में जस्टिस शर्मा ने वन विभाग को गौशाला में हर साल पांच हजार पौधे लगाने का भी निर्देश दिया. बताते चले की जस्टिस शर्मा बुधवार को ही रिटायर हो रहे है.

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