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उडी हमलें के बाद कथित राष्ट्रवाद के नाम पर पाक कलाकारों का विरोध और फिर अब भारतीय सेना के नाम पर की जा रही राज ठाकरे की घटिया राजनीति के चलते भारतीय सेना ने आलोचना की हैं.

NBT के अनुसार, सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘सेना को राजनीति में न घसीटिए जो मजबूत, गैर-राजनीतिक, उच्च-अनुशासित और धर्मनिरपेक्ष है. सुरक्षा बल नहीं चाहते कि उन्हें इस निचले स्तर की राजनीतिक लड़ाई में घसीटा जाए.’ एक और अधिकारी ने कहा, ‘हम सिर्फ उसी फंड को स्वीकार करते हैं जो स्वेच्छा से दिया जाता है न कि इस तरह की जबरदस्ती से.’

एयर वाइस मार्शल मनमोहन बहादुर (रिटायर्ड) ने इस बारें में कहा, ‘4 दशकों के अपने सेवाकाल में मैंने कभी भी जबरन वसूले गए धन का समर्थन नहीं किया. मेरे देश में यह क्या हो रहा है?’

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ट्वीट कर उन्होंने कहा, ‘सेना वेलफेयर फंड में सहयोग की पीछे देशवासियों की भावनाओं और प्यार पर कभी भी शक नहीं करती. लेकिन यह राज ठाकरे द्वारा वसूला हुआ नहीं हो सकता.’

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वहीँ लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (रिटायर्ड) ने भी इसकी आलोचना करते हुए कहा कि हरगिज नहीं.


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