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नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने रिजर्व बैंक के गर्वनर रघुराम राजन के दूसरे कार्यकाल का आग्रह ना करने के फैसले को देश के लिए ‘दुखद’ बताते हुए कहा कि भारत दुनिया के सबसे दक्ष आर्थिक विचारकों में से एक खो रहा है. उन्होंने कहा कि आरबीआइ एक पूर्णतः स्वायत्त संस्था नहीं है। यह देश और सरकार के लिए दुख की बात है.

अमर्त्य सेन ने आगे कहा कि यह सच है की रूलिंग पार्टी में कई लोग हैं जो रघुराम राजन को पसंद नहीं करते है। यह निश्चित रूप से दुर्भाग्यपूर्ण है. रघुराम राजन नरेंद्र मोदी के कोई बड़े प्रशंसक नहीं है.

इंफोसिस के भारतीय मूल के सीईओ विशाल सिक्का ने इस मामले पर कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर के रूप में रघुराम राजन असाधारण रहे हैं और उनके पास ग्रीन कार्ड होना कोई मुद्दा नहीं होना चाहिए.

उन्होंने आगे कहा, वह असाधारण गवर्नर रहे हैं और हम उनके जीवन और शिक्षण के लिए शुभकामनाएं देते हैं. मैं यह देखना चाहूंगा कि साथ काम करने का कोई तरीका निकल आए, लेकिन उन्होंने असाधारण काम किया है और हम उन्हें शुभकामनाएं देना चाहते हैं.


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