मुंबई | किसानो को राहत पहुँचाने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने एक अच्छी पहल की थी. मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडनविस ने तूर (अरहर) दाल को सीधे किसानो से खरीदने का फैसला किया था. लेकिन अब सरकार की यह पहले किसानो के लिए कम , बिचौलियों के लिए ज्यादा फायदेमंद दिख रही है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बिचौलियों ने सरकार की इस योजना का फायदा उठाकर उनको 400 करोड़ रूपए का चूना लगा दिया.

एबीपी न्यूज़ की खबर अनुसार बिचौलियो ने सरकार की योजना का फायदा उठाते हुए किसानो से कम दाम में दाल खरीदी और वापिस सरकार को ज्यादा दामो में बेच दिया. यह बात महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने भी मानी है. उन्होंने दाल घोटाले की बात को स्वीकार करते हुए कहा की मामले की जांच की जा रही है. इसके अलावा घोटालेबाजो को भी ढूँढा जा रहा है. एक अनुमान के मुताबिक सरकार को 400 करोड़ रूपए का नुकसान हुआ है.

फडनविस ने बताया की हम इस बात का भी पता लगाने की कोशिश कर रहे है की सरकार को इससे कितना नुक्सान हुआ है. दरअसल इस बात का खुलासा तब हुआ जब कुछ ऐसे व्यक्ति सामने आये जिनके पास न खेती की जमीन है और न ही वो किसान है , लेकिन फिर भी उन्होंने सरकार को दाले बेचीं. एक ऐसी ही कथित किसान है बिस्मिल्लाह. बिस्मिल्लाह जालना दाल मंदी से सवा किलोमीटर दूर बुलढाणा शहर में बैट्री की दुकान करते है.

कोई खेती की जमीन नही होने के बावजूद इन्होने सरकार को 57 क्विंटल दाल बेचीं. सरकार ने इनको 5 हजार 50 रूपए प्रति क्विंटल के हिसाब से 2 लाख 80 हजार 850 रूपए का पेमेंट किया. जब इस बात का खुलासा हुआ की बिस्मिल्लाह जैसे कितने ही बिचौलियों ने किसानो से कम दाम में दाल खरीदकर सरकार को महंगे दामो में बेचीं तब जाकर सरकार की नींद खुली और उन्होंने जांच का आदेश दिया.


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