नई दिल्ली: पठानकोट एयरबेस पर हुए आतंकवादी हमले के बाद जहां पीएम मोदी की दोस्ताना लाहौर यात्रा को लेकर काफी तीखी आलोचना हो रही है, वहीं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इस मसले पर मजबूती से मोदी के साथ खड़ा है। संघ का मानना है कि मोदी का लाहौर जाकर नवाज शरीफ से मिलने का फैसला उनकी गलती नहीं है। संघ का कहना है कि विदेश नीति में किसी भी तरह की कूटनीतिक पहल को लेने का फैसला पीएम का विशेषाधिकार है।

हालांकि संघ को यह बखूबी पता है कि भारत में पाकिस्तान के साथ किसी भी तरह की बातचीत या दोस्ती की पहल को लेकर आम राय काफी नकारात्मक है, लेकिन साथ ही संघ को यह भी मालूम है कि पड़ोसी देश के साथ अच्छे संबंध बहाल करने के लिए बातचीत का सहारा लेना कितना जरूरी है। संघ ने पाकिस्तान के साथ पहले के सभी विवादों को पीछे छोड़ने की जरूरत पर जोर दिया।

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संघ और बीजेपी के बीच सितंबर में हुए एक संवाद के बाद संघ के वरिष्ठ नेता दत्तात्रेय होसबले ने यह कहकर लोगों को हैरानी में डाल दिया, ‘कई बार पाकिस्तान के साथ संबंधों में खटास आ जाती है, ऐसे ही जैसे भाइयों के बीच भी कभी-कभी होता है। हमने (बीजेपी और संघ) बातचीत की कि किस तरह हम, ऐसे देश जो कि ऐतिहासिक व भौगोलिक तौर पर हमारे साथ जुड़े हुए हैं, अपने रिश्तों को बेहतर बना सकते हैं।’

संघ का कहना है कि भारत भले ही पाकिस्तान की तरफ बातचीत के लिए दोस्ती का हाथ बढ़ाए, लेकिन इसके लिए भी भारत को बेहद मजबूत स्थिति में रहना होगा। संघ का कहना है कि बातचीत की इस प्रक्रिया के बीच भारत को अपनी ताकत व आंतरिक सुरक्षा के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं करना चाहिए।

पठानकोट एयरबेस पर हुआ आतंकी हमला मोदी सरकार को अब तक मिली सबसे बड़ी चुनौती है। इससे कहीं-न-कहीं भारत की कमजोर स्थिति का भी संदेश गया है। इससे संघ की चिंता बढ़ सकती है। संगठन को उम्मीद है कि मोदी सरकार अब आगे जो भी कार्रवाई करेगी, अपनी आंखें खुली रखकर ही करेगी। वहीं दूसरी तरह, संघ फिलहाल इस समय लाहौर की मोदी-शरीफ मुलाकात व इसके समय को लेकर जल्दबाजी में किसी भी नतीजे पर नहीं पहुंचना चाहता है। संघ फिलहाल इस बात पर गंभीरता से ध्यान दे रहा है कि पठानकोट हमले के संदर्भ में मोदी सरकार पाकिस्तान के साथ जिम्मेदारी तय करने की दिशा में किस तरह आगे बढ़ती है। बताया जा रहा है कि संघ को केंद्र सरकार की सुरक्षा व विदेश नीति पर भी पूरा भरोसा है, लेकिन उसका मानना है कि मोदी सरकार को पाकिस्तान के साथ वार्ता के दौरान भी मुस्तैद रहना होगा और एहतियात बरतना होगा।

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आतंकवादी वारदातों का जवाब देने में भारत की सीमाओं के बारे में भी संघ को अच्छी तरह पता है। संघ नेताओं का मानना है कि भारत को एक ओर जहां पाकिस्तान के साथ वार्ता जारी रखनी चाहिए, वहीं आतंकवाद से निपटने के लिए खुद को मजबूत करने, खुफिया एजेंसियों को ज्यादा प्रभावी बनाने और रक्षा के क्षेत्र में काबिलियत व निर्भरता बढ़ाने जैसे मुद्दों पर भी भारत को गंभीरता से आगे बढ़ना चाहिए।

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संघ ने अभी हाल ही में विदेशों में रहने वाले अपने लगभग 700 कार्यकर्ताओं की बैठक बुलाई थी। इसमें संघ ने उनसे विदेश में रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों की परेशानियों और चिंताओं के बारे में जानकारी हासिल करने की कोशिश की। संघ को बखूबी पता है कि भारत के अंदर और बाहर खुद के व अपने साथी संगठनों के हितों को आगे ले जाने का यही उनके पास सबसे अच्छा मौका है। साभार: नवभारत टाइम्स

 


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