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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को देश के पहले शिक्षामंत्री और महान स्वतंत्रता सेनानी मौलाना अबुल कलाम आजाद को उनके जन्मदिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित की.

उन्होंने अपने ट्वीट में कहा, ‘भारतीय इतिहास के दो दिग्गजों को श्रद्धांजलि. भारत के स्वतंत्रता आंदोलन और उसके बाद देश के निर्माण में उनके योगदान बेहद लाभदायक रहे.’ एक शिक्षाविद् और स्वतंत्रता सेनानी आजाद भारत के पहले शिक्षा मंत्री थे, जिन्होंने शिक्षित राष्ट्र की नींव रखी.

साथ ही कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने भी मौलाना अब्दुल कलाम आजाद की 129वीं जयंती पर उन्हें याद किया. कांग्रेस उपाध्यक्ष ने अपने संबोधन में कहा, मौलाना आजाद स्वतंत्रता संग्राम के एक महत्वपूर्ण स्तंभ थे, वे एक कुशल राजनीतिज्ञ भी थे। राहुल ने ट्विट कर कहा, वे हमेशा से हमें प्रेरित करते रहे हैं. साथ ही, यह भी कहा कि मौलाना आजाद एक शिक्षाविद् के अलावा एक स्वतंत्रता सेनानी भी थे उन्होंने ही शिक्षित भारत की नींव रखी.

मौलाना अबुल कलाम आज़ाद या अबुल कलाम गुलाम मुहियुद्दीन (11 नवंबर, 1888 – 22 फरवरी, 1958) एक प्रसिद्ध भारतीय मुस्लिम विद्वान थे. वे कवि, लेखक, पत्रकार और भारतीय स्वतंत्रता सेनानी थे. भारत की आजादी के वाद वे एक महत्त्वपूर्ण राजनीतिक रहे. वे महात्मा गांधी के सिद्धांतो का समर्थन करते थे. उन्होंने हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए कार्य किया, तथा वे अलग मुस्लिम राष्ट्र (पाकिस्तान) के सिद्धांत का विरोध करने वाले मुस्लिम नेताओ में से थे. खिलाफत आंदोलन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही. 1923 में वे भारतीय नेशनल काग्रेंस के सबसे कम उम्र के प्रेसीडेंट बने. वे 1940 और 1945 के बीच काग्रेंस के प्रेसीडेंट रहे. आजादी के वाद वे भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के रामपुर जिले से 1952 में सांसद चुने गए और वे भारत के पहले शिक्षा मंत्री बने.


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