नई दिल्ली  राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के दफ्तर ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा भेजी गई एक फाइल को लौटा दिया है। इस फाइल में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की कार्यकारी परिषद में खाली पड़ी एक सीट पर नियुक्ति के लिए कुछ उम्मीदवारों के नाम दिए गए थे। जानकारी के मुताबिक, राष्ट्रपति के दफ्तर से यह फाइल वापस मंत्रालय को भेजकर नियुक्ति के लिए संभावित उम्मीदवारों की सूची में अधिक नाम शामिल करने का निर्देश दिया गया है।

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हिंदुस्तान टाइम्स की एक खबर के मुताबिक मंत्रालय ने AMU में नियुक्ति के लिए जो नाम राष्ट्रपति के पास भेजे थे, उनमें इंडिया टीवी के प्रमुख संपादक रजत शर्मा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े एक संगठन विजनन भारती के प्रमुख विजय. पी. भटकार का नाम शामिल था। मालूम हो कि भटकार को भारत के पहले सुपरकंप्यूटर का वास्तुकार भी माना जाता है। विजनन भारती स्वदेशी विज्ञान आंदोलन के क्षेत्र में सक्रिय है।

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राष्ट्रपति की ओर से इस फाइल को लौटाते हुए मंत्रालय से कहा गया है कि वह कुछ और नाम भेजे। मालूम हो कि यूनिवर्सिटी में निर्णय लेना का सर्वोच्च अधिकार कार्यकारी परिषद के पास ही होता है। परिषद में कुल 28 सदस्य होते हैं। इनमें में 3 नामों का प्रस्ताव मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से किया जाता है, लेकिन नियुक्ति के लिए उम्मीदवार के नाम पर राष्ट्रपति की मुहर लगना अनिवार्य है। राष्ट्रपति ही केंद्रीय विश्वविद्यालयों के कुलपति होते हैं।

मंत्रालय की ओर से इस संबंध में कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया गया। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘उम्मीदवारों के नामों पर जल्द ही चर्चा होगी और नाम तय किए जाएंगे। इस प्रक्रिया में कुछ समय लगेगा।’ एक सूत्र ने बताया कि अब रजत शर्मा और भटकार के नामों पर फिर से विमर्श करने की संभावना नहीं है।

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52745672यह पहला मौका नहीं है जब राष्ट्रपति ने मंत्रालय द्वारा चुने गए नामों पर सवाल खड़ा किया है। हाल ही में स्मृति ईरानी और राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के बीच विश्व भारती के उपकुलपति को हटाए जाने के मुद्दे पर विरोध था। राष्ट्रपति के दफ्तर ने मंत्रालय द्वारा उपकुलपति को हटाए जाने संबंधी प्रस्ताव की फाइल लौटाकर फिर से पूरे मसले की जांच करने का निर्देश दिया था।

इसी साल जनवरी में राष्ट्रपति ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के उपकुलपति के तौर पर जगदीश कुमार की नियुक्ति करते समय मानव संसाधन विकास मंत्री की अनुशंसा को नजरंदाज कर दिया था।

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मालूम हो कि मंत्रालय पहले से ही देशभर में यूनिवर्सिटी के नए केंद्रों की स्थापना के मुद्दे पर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के साथ उलझा हुआ है। विपक्ष ने भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। विपक्ष का आरोप है कि मंत्रालय AMU के मामलों में गैरजरूरी दखलंदाजी कर रहा है। AMU के उपकुलपति जमीरउद्दीन शाह ने गुरुवार को कहा था कि वह खुद पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। शाह ने कहा था कि केरल, बिहार और पश्चिम बंगाल में AMU के नए केंद्र शुरू करने के मुद्दे पर स्मृति ईरानी के इनकार को लेकर पीएम के साथ बातचीत कर चीजें स्पष्ट करने की कोशिश करेंगे। ईरानी ने इन यूनिवर्सिटी केंद्रों को अवैध बताया था। (NBT)


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