सौजन्य: डीडी न्यूज़

नई दिल्ली | भारत के 13वे राष्ट्रपति के रूप में महामहिम प्रणव मुख़र्जी का कार्यकाल मंगलवार को खत्म हो रहा है. कल देश के 14वे राष्ट्रपति के रूप में रामनाथ कोविंद शपथ लेंगे. इससे पहले राष्ट्रपति ने आज शाम आखिरी बार राष्ट्र को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने लोकतंत्र में बहस की जरुरत को समझाया और हिंसा को एक लोकतान्त्रिक समाज के लिए खतरा बताया.

सोमवार शाम को देश को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति प्रणव मुख़र्जी ने कहा ,’ मैं भारत के लोगो के प्रति कृतज्ञता जाहिर करता हूँ जिन्होंने मुझ पर इतना विश्वास किया. जितना मैंने इस देश को दिया उससे कई गुना मुझे वापिस मिला, इसके लिए मैं भारत के लोगो का सदैव ऋणी रहूँगा. 5 साल पहले जब मैंने देश के राष्ट्रपति पद की शपथ ली , तब मैंने संविधान के संरक्षण और रक्षा की कसम खायी थी’.

राष्ट्रपति ने आगे कहा,’ इन पांच सालो में हर दिन मुझे अपनी जिम्मेदारी का भान रहा. मैं अपनी जिम्मेदारी निभाने में कितना सफल रहा , इसका फैसला तो समय करेगा , इतिहास के चश्मे से. पिछले 50 सालो के सार्वजानिक जीवन में मेरी पवित्र किताब संविधान रही और भारत की संसद मेरा मंदिर, जबकि लोगो की सेवा करना मेरा जूनून.’ राष्ट्रपति ने अभी हाल ही में हुई हिंसा की घटनाओं पर भी अपनी बात रखी.

उन्होंने कहा,’ भारत की आत्मा बहुवाद और सहिष्‍णुता में बसती है. देश की संस्कृति, विश्वास और भाषा में निहित विविधता ही भारत को विशेष बनाती है. हमें इसी सहिष्‍णुता से ताकत मिलती है जो सदियों से हमारी सामूहिक चेतना का अंग रहा है. सार्वजानिक जीवन में विभिन्न मत हो सकते है, हम बहस कर सकते है, हम सहमत हो सकते है, असहमत हो सकते है. मगर हम विभिन्न मतों की मौजूदगी को नजरंदाज नही कर सकते.’

राष्ट्रपति ने देश के विकास में गरीबो को मुख्यधारा का हिस्सा बनाने की वकालत की. उन्होंने कहा की विकास को साकार होने के लिए , देश के गरीबो को लगना चाहिए की भी मुख्यधारा का हिस्सा है. हमें हर गरीब को गरीबी से उठाना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा की हमारी नीतियों का लाभ देश के आखिरी व्यक्ति तक पहुंचे. गरीबी का उन्मूलन होगा तभी खुशहाली को पंख लगेगे.


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